
एक्स-रे से आगे एआई तक पहुंची रेडियोलॉजी, रिम्स कॉन्क्लेव में आधुनिक जांच तकनीकों पर चर्चा
झारखंड मस्कुलोस्केलेटल इमेजिंग कॉन्क्लेव-2026 में जुटे विशेषज्ञ; बीमारियों की सटीक पहचान और बेहतर उपचार में इमेजिंग की भूमिका पर दिया जोर

रांची: रेडियोलॉजी में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग से बीमारियों की पहचान और उपचार की योजना बनाने के तरीके बदल रहे हैं। रिम्स में आयोजित झारखंड मस्कुलोस्केलेटल इमेजिंग कॉन्क्लेव-2026 में विशेषज्ञों ने इमेजिंग के क्षेत्र में आए बदलावों और चिकित्सा में उनकी उपयोगिता पर चर्चा की।
विशेषज्ञों ने कहा कि रेडियोलॉजी अब केवल एक्स-रे तक सीमित नहीं है। अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा रोबोटिक तकनीकों का उपयोग भी इस क्षेत्र को आगे बढ़ा रहा है।
बीमारी की बारीक पहचान में मददगार इमेजिंग
कॉन्क्लेव में वक्ताओं ने बताया कि आधुनिक इमेजिंग तकनीकें शरीर में होने वाले बदलावों को अधिक विस्तार से समझने में मदद करती हैं। इससे बीमारी की पहचान और उपचार संबंधी निर्णय अधिक सटीक बनाने में सहायता मिलती है।
विशेषज्ञों ने मरीजों की जांच में उपयुक्त तकनीक के चयन और जांच से मिली जानकारी के सही विश्लेषण की अहमियत भी बताई। उनका जोर इस बात पर रहा कि बेहतर इमेजिंग, प्रभावी उपचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे विशेषज्ञ
रिम्स और इंडियन रेडियोलॉजिकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड के अलावा पटना, बेंगलुरु, लखनऊ और चंडीगढ़ से विशेषज्ञ शामिल हुए। वक्ताओं ने हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों से जुड़ी इमेजिंग सहित विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव साझा किए।
दर्द के उपचार में भी रेडियोलॉजी की भूमिका
रिम्स के ट्रॉमा एवं क्रिटिकल केयर सेंटर के हेड डॉ. रंजन सिन्हा ने पीठ की समस्याओं और दर्द के उपचार पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक दर्दनिवारक दवाओं का अधिक इस्तेमाल लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में रेडियोलॉजी और इमेजिंग की मदद से बीमारी को समझने तथा उपचार की दिशा तय करने में सहायता मिल सकती है।
नई तकनीकों को अपनाने पर जोर
रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिन्हा ने कहा कि रेडियोलॉजी तेजी से आधुनिक तकनीकों को अपना रही है। विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रमोहन ने नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी। विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश टोप्पो ने कॉन्क्लेव को युवा चिकित्सकों और चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के अनुभवों से नई जांच तकनीकों और उनके व्यावहारिक उपयोग को समझने का अवसर मिलता है।




