1969 से हो रहा दुर्गोत्सव, 40 फीट ऊंचे और 55 फीट चौड़े पंडाल में बांस-टोकरी-सूप से दिखेगी झारखंडी लोककला; 13 फीट की होगी मां दुर्गा की प्रतिमा

रांची। राजधानी रांची के कचहरी चौक पर इस बार दुर्गापूजा के दौरान श्रद्धालुओं को लोककला और पारंपरिक शिल्प की खास झलक देखने को मिलेगी। संग्राम क्लब दुर्गा पूजा समिति इस वर्ष ‘प्रकृति एवं परंपरा-लोकशिल्प में मां दुर्गा’ थीम पर पूजा पंडाल तैयार कर रही है। समिति की ओर से वर्ष 1969 से लगातार दुर्गोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
इस बार बनाया जा रहा पंडाल करीब 40 फीट ऊंचा और 55 फीट चौड़ा होगा। इसकी सजावट में स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को प्रमुखता दी जा रही है। पंडाल के अंदर करीब 13 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। पूरे आयोजन पर लगभग 14 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
बांस और टोकरी से सजेगा पंडाल
पंडाल निर्माण में इस बार आधुनिक सजावट के साथ पारंपरिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिए बांस, टोकरी, सूप और हुगला जैसी स्थानीय हस्तशिल्प सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।
पारंपरिक बुनाई और लोकशिल्प को अलग-अलग कलात्मक रूप में पंडाल की सजावट का हिस्सा बनाया जा रहा है। कोशिश है कि श्रद्धालुओं को पूजा के साथ झारखंड और देश की लोक परंपराओं की कलात्मक पहचान भी देखने को मिले।
लोककला के जरिए परंपरा को सम्मान
समिति के कार्यकारी अध्यक्ष नीरज वर्मा ने बताया कि इस वर्ष की थीम का मकसद केवल मां दुर्गा की आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को भी सामने लाना है।
पंडाल में प्राकृतिक सामग्री की खूबसूरत बुनावट को खास आकर्षण बनाया जा रहा है। लोकशिल्प की इसी शैली को आधुनिक प्रस्तुति के साथ जोड़कर पंडाल को तैयार किया जा रहा है।
श्रद्धालुओं के लिए होगा अलग अनुभव
संग्राम क्लब का यह आयोजन हर साल शहरवासियों के बीच आकर्षण का केंद्र रहता है। इस बार भी समिति की कोशिश है कि पंडाल की सजावट के जरिए प्रकृति, परंपरा और लोककला को एक साथ प्रस्तुत किया जाए।
दुर्गापूजा के दौरान कचहरी चौक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को पूजा के साथ पारंपरिक शिल्प और कलात्मक सजावट का अलग अनुभव देखने को मिलेगा।





