चोरी के बाद एक साल तक सड़क पर दौड़ती रही बाइक, 7 बार कटा ई-चालान; फिर भी पुलिस के हाथ खाली
डोरंडा से चोरी हुई थी बाइक, ट्रैफिक कैमरों में जगन्नाथपुर से नई विधानसभा तक कई बार दिखी; मालिक के मोबाइल पर आते रहे चालान के मैसेज

रांची। राजधानी में वाहन चोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें चोरी की बाइक लंबे समय तक सड़कों पर चलती रही और ट्रैफिक कैमरों ने उसकी आवाजाही भी दर्ज की। इसके बावजूद बाइक बरामद नहीं हो सकी। डोरंडा थाना क्षेत्र से चोरी हुई बाइक से बिना हेलमेट चलने पर सात बार ई-चालान भी काटे गए।
ट्रैफिक विभाग के ऑटोमैटिक कैमरों में बाइक के जगन्नाथपुर, धुर्वा, सिंह मोड़, रिंग रोड और नई विधानसभा क्षेत्र के आसपास से गुजरने की जानकारी सामने आई। चालान के मैसेज बाइक के मूल मालिक के मोबाइल पर पहुंचते रहे।
12 जून 2025 को घर के पास से चोरी हुई थी बाइक
जानकारी के अनुसार डोरंडा थाना क्षेत्र के रुई टोला निवासी शोमैन गौराई की बाइक जेएच-01बीएफ-8474 12 जून 2025 को घर के पास खड़ी थी। दोपहर करीब 1:50 बजे जब वह बाहर निकले, तो बाइक वहां नहीं मिली।
आसपास तलाश करने के बाद भी बाइक का पता नहीं चला। इसके बाद उन्होंने डोरंडा थाना में बाइक चोरी की प्राथमिकी दर्ज करायी।
चोरी के बाद बिना हेलमेट चलते रहे बाइक सवार
बाइक चोरी होने के बाद उसके मालिक को लगातार ई-चालान के मैसेज मिलने लगे। जांच करने पर पता चला कि चोरी हो चुकी बाइक शहर की सड़कों पर चल रही है और ट्रैफिक कैमरों में उसकी तस्वीरें रिकॉर्ड हो रही हैं।
बिना हेलमेट वाहन चलाने के मामले में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 194डी के तहत एक-एक हजार रुपये के सात ई-चालान काटे गए।
चालान में दर्ज लोकेशन के अनुसार बाइक अलग-अलग समय पर जगन्नाथपुर, धुर्वा, शहीद मैदान चौक, सिंह मोड़ और नई विधानसभा क्षेत्र के आसपास देखी गयी।
कैमरों में लोकेशन मिली, फिर भी बरामद नहीं हुई बाइक
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि चोरी की बाइक के नंबर से जुड़े चालान लगातार सामने आने के बावजूद उसे बरामद क्यों नहीं किया जा सका। ट्रैफिक कैमरों से बाइक के गुजरने की जगह और समय की जानकारी मिलती रही, लेकिन अब तक बाइक पुलिस के हाथ नहीं लगी है।
बाइक मालिक का कहना है कि वह अपनी बाइक की बरामदगी के लिए लगातार पुलिस और थाना के चक्कर लगा रहे हैं। चोरी के बाद बाइक का लगातार इस्तेमाल होना और सात बार ई-चालान कटने के बावजूद बरामदगी नहीं होना पुलिस की कार्रवाई और ट्रैफिक कैमरों से मिलने वाली सूचनाओं के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
अब इस मामले में यह देखना अहम होगा कि पुलिस ई-चालान और कैमरों से मिली लोकेशन के आधार पर बाइक और उसे चला रहे व्यक्ति तक कब पहुंचती है।




