
रांची में कुत्तों का बढ़ता आतंक, 6 महीने में 31 हजार से ज्यादा लोगों को काटा; हर दिन 170 से अधिक मामले
मार्च से अगस्त तक सरकारी अस्पतालों में 31,368 डॉग बाइट के केस दर्ज, अगस्त में भी 4,355 लोग पहुंचे अस्पताल; रेबीज से बचाव को लेकर बढ़ी चिंता

रांची। राजधानी रांची में कुत्तों के काटने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। मार्च से अगस्त तक छह महीने में सदर अस्पताल समेत जिले के सभी 14 प्रखंडों के सरकारी अस्पतालों में 31,368 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए। आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में औसतन हर दिन 170 से अधिक लोग कुत्ते के काटने के बाद इलाज के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।
राहत की बात यह रही कि इस दौरान एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता बनी रही और मरीजों को निर्धारित उपचार दिया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इन मामलों में किसी मरीज में रेबीज की पुष्टि नहीं हुई है।
मार्च-अप्रैल में सबसे ज्यादा मामले
आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च और अप्रैल में डॉग बाइट के मामले छह हजार से अधिक रहे। इसके बाद मामलों की संख्या में कुछ कमी जरूर आई, लेकिन हर महीने चार हजार से ज्यादा लोग कुत्ते के काटने के बाद अस्पताल पहुंचते रहे।
महीनेवार आंकड़े देखें तो:
- मार्च: 6,066 मामले
- अप्रैल: 6,012 मामले
- मई: 5,423 मामले
- जून: 4,925 मामले
- जुलाई: 4,209 मामले
- अगस्त: 4,355 मामले
यानी अगस्त में भी 4,355 लोगों को डॉग बाइट के बाद सरकारी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ा। लगातार इतने मामले सामने आने से आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके नियंत्रण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कुत्ते के काटने पर तुरंत करें ये काम
सदर अस्पताल के डॉ. हरिश चंद्र के अनुसार, कुत्ते के काटने के बाद घबराने के बजाय तुरंत प्राथमिक उपचार करना चाहिए। घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना जरूरी है। इसके बाद बिना देरी स्वास्थ्य केंद्र जाकर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। WHO भी संभावित रेबीज संक्रमण की स्थिति में घाव को तुरंत साबुन और पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोने और चिकित्सा सहायता लेने की सलाह देता है।
हर काटने को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी
कुत्ते के काटने या खरोंच को मामूली समझकर इलाज टालना जोखिम भरा हो सकता है। संपर्क की प्रकृति और घाव की गंभीरता के आधार पर डॉक्टर एंटी-रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन देने की सलाह दे सकते हैं। WHO के अनुसार त्वचा को भेदने वाले काटने या खरोंच और खुले घाव पर संक्रमित जानवर की लार के संपर्क जैसी गंभीर स्थितियों में तत्काल पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस की जरूरत होती है।
लक्षण आने का इंतजार न करें
रेबीज का संक्रमण गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। WHO के अनुसार जब रेबीज के क्लिनिकल लक्षण दिखाई देने लगते हैं, तब यह बीमारी लगभग हमेशा घातक होती है। वहीं समय पर पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस से संक्रमण को रोकना संभव है। इसलिए कुत्ते के काटने के बाद केवल इस आधार पर इलाज नहीं टालना चाहिए कि घाव छोटा है या कुत्ता सामान्य दिखाई दे रहा है।
कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण भी जरूरी
डॉग बाइट के मामलों को कम करने के लिए केवल अस्पतालों में वैक्सीन की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। इसके साथ कुत्तों का टीकाकरण, आबादी नियंत्रण और आवारा कुत्तों से जुड़े रेबीज नियंत्रण उपायों पर भी ध्यान देना जरूरी है। WHO के अनुसार कुत्तों का बड़े स्तर पर टीकाकरण मानव रेबीज की रोकथाम का महत्वपूर्ण उपाय है।
शहरों में खुले में फेंका जाने वाला खाद्य कचरा भी आवारा कुत्तों के जमावड़े को बढ़ा सकता है। इसलिए बेहतर कूड़ा प्रबंधन और कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के उपायों को भी प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है।
बच्चों को कुत्तों से दूरी बनाकर रखने की सलाह
बच्चों को आवारा कुत्तों के पास जाने या उन्हें छेड़ने से बचना चाहिए। किसी बच्चे को कुत्ता काट ले या खरोंच दे तो घटना छिपाने के बजाय तुरंत परिजनों को बताकर स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए। WHO के अनुसार बच्चों में डॉग बाइट का जोखिम खास तौर पर महत्वपूर्ण है और उन्हें कुत्तों के आसपास बिना निगरानी के नहीं छोड़ना चाहिए।




