विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार वायु प्रदूषण को डिमेंशिया के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल किया है। WHO का कहना है कि सही जीवनशैली और जोखिम कारकों पर नियंत्रण रखकर लगभग 45% मामलों को रोका या टाला जा सकता है।

नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डिमेंशिया की रोकथाम को लेकर नई वैश्विक गाइडलाइन जारी की है। इसमें पहली बार वायु प्रदूषण को डिमेंशिया का एक प्रमुख जोखिम कारक माना गया है। WHO का कहना है कि यदि जोखिम बढ़ाने वाले कारणों पर समय रहते नियंत्रण किया जाए, तो करीब 45 प्रतिशत डिमेंशिया के मामलों को रोका या देर से विकसित होने से बचाया जा सकता है।
WHO के अनुसार, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता और अब वायु प्रदूषण जैसे कारक मस्तिष्क के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। संगठन ने यह भी सलाह दी है कि जिन लोगों में विटामिन या ओमेगा-3 की कमी का चिकित्सकीय प्रमाण नहीं है, उन्हें केवल डिमेंशिया की रोकथाम के उद्देश्य से इन सप्लीमेंट्स का नियमित सेवन नहीं करना चाहिए।
यह 2019 के बाद WHO की डिमेंशिया रोकथाम संबंधी गाइडलाइन में पहला बड़ा संशोधन है। नई सिफारिशें बढ़ते वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित हैं, जिनसे पता चलता है कि स्वस्थ जीवनशैली, पुरानी बीमारियों का बेहतर प्रबंधन और पर्यावरणीय जोखिमों को कम करना मस्तिष्क को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
WHO ने कहा कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से संज्ञानात्मक क्षमता (Cognitive Function) प्रभावित हो सकती है और उम्र बढ़ने के साथ डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए साफ हवा और स्वस्थ जीवनशैली, दोनों ही मस्तिष्क की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं।

