अमेरिका ने छात्र वीजा नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब तय अवधि का वीजा, सीमित अकादमिक बदलाव और बार-बार वीजा विस्तार की प्रक्रिया से विदेशी छात्रों की लागत और अनिश्चितता बढ़ सकती है।

वॉशिंगटन: अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने विदेशी छात्रों और कुछ अन्य श्रेणियों के वीजा नियमों में बड़े बदलाव को अंतिम रूप दे दिया है। नए नियमों के लागू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई करना पहले की तुलना में अधिक महंगा और जटिल हो सकता है।
नए नियमों के तहत अधिकांश F-1 छात्र वीजा अब निश्चित अवधि के लिए जारी किए जाएंगे। आमतौर पर छात्रों को अधिकतम चार वर्ष तक रहने की अनुमति मिलेगी। इसके बाद पढ़ाई जारी रखने, वीजा बढ़ाने या स्टेटस बदलने के लिए उन्हें फिर से आवेदन करना होगा। पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाली ग्रेस पीरियड भी घटाकर 30 दिन कर दी गई है। वहीं अंग्रेजी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के छात्रों के लिए रहने की अवधि 24 महीने तक सीमित रहेगी।
DHS ने अकादमिक लचीलापन भी कम कर दिया है। स्नातक स्तर के छात्र पहले वर्ष में अपना विषय, कार्यक्रम या शिक्षा स्तर नहीं बदल सकेंगे। वहीं स्नातकोत्तर छात्रों के लिए नियम और सख्त होंगे। वे अपने कार्यक्रम या अध्ययन क्षेत्र में बदलाव नहीं कर पाएंगे और एक ही स्तर पर दूसरा कोर्स करने की अनुमति भी नहीं होगी।
सरकार के अनुसार, फिलहाल अमेरिका में मौजूद छात्रों के लिए संक्रमणकालीन व्यवस्था लागू रहेगी। हालांकि नया सिस्टम 17 सितंबर से प्रभावी हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन बदलावों से भारतीय छात्रों पर भी असर पड़ेगा। ओपन डोर्स रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार अमेरिका में लगभग 3.6 लाख भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं, जो कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों का करीब 31 प्रतिशत हैं। नए नियमों के कारण वीजा विस्तार, दस्तावेजी प्रक्रिया, बायोमेट्रिक औपचारिकताओं और अतिरिक्त खर्च में बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है।

