पश्चिमी सिंहभूम में FPO को आत्मनिर्भर बनाने की पहल, स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर रहेगा फोकस

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DC मनीष कुमार की अध्यक्षता में चाईबासा में कार्यशाला, कृषि से लेकर वनोपज तक वैल्यू एडिशन और बाजार विस्तार पर जोर; करीब ₹2 करोड़ के आम की बिक्री का भी हुआ उल्लेख

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में किसान उत्पादक कंपनियों यानी FPO (Farmer Producer Organisations) को मजबूत, आत्मनिर्भर और व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने के लिए जिला प्रशासन ने नई पहल शुरू की है। इसी कड़ी में गुरुवार को जिला समाहरणालय सभागार में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें एफपीओ की क्षमता बढ़ाने, व्यवसाय विस्तार और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

कार्यशाला में जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि एफपीओ का उद्देश्य केवल किसानों को एक संगठन से जोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें उत्पादन से लेकर बाजार तक एक मजबूत व्यावसायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना होना चाहिए।

‘वोकल फॉर लोकल’ के जरिए स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बाजार

उपायुक्त मनीष कुमार ने एफपीओ प्रतिनिधियों से ‘वोकल फॉर लोकल’ की अवधारणा के अनुरूप काम करने को कहा। उन्होंने जिले में तैयार होने वाले कृषि उत्पादों के साथ डेयरी, मत्स्य पालन, बागवानी और वनोपज को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

इसके लिए स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग, वैल्यू एडिशन और प्रभावी मार्केटिंग पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया। उद्देश्य यह है कि स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों की पहचान जिले और राज्य से बाहर के बाजारों तक बनाई जा सके और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिले।

हाई वैल्यू फसलों और आधुनिक कृषि तकनीक पर जोर

उपायुक्त ने किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ अधिक आय देने वाली हाई वैल्यू फसलों से जोड़ने की आवश्यकता बताई। इसके अलावा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और एफपीओ के माध्यम से सामूहिक विपणन व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

उन्होंने कहा कि एफपीओ किसानों को उत्पादन, तकनीक, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग जैसे विभिन्न स्तरों पर सहयोग देने वाली मजबूत व्यावसायिक इकाई के रूप में काम करें।

जिले में करीब ₹2 करोड़ के आम की बिक्री

कार्यशाला के दौरान उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने जिले में कृषि और बागवानी के क्षेत्र में हो रहे बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में JSLPS, मनरेगा और अन्य विभागों के सहयोग से करीब दो करोड़ रुपये मूल्य के आम का विक्रय किया गया है।

उन्होंने इसे स्थानीय किसानों और बागवानी क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत बताते हुए ऐसी गतिविधियों को और विस्तार देने की जरूरत बताई।

‘दीदी कैफे’ से स्थानीय उत्पादों को नई पहचान

उप विकास आयुक्त ने ‘दीदी कैफे’ जैसी पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास स्थानीय उत्पादों को नई पहचान देने के साथ उनके लिए बाजार तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

जिले में सफलतापूर्वक की जा रही स्ट्रॉबेरी की खेती को भी अन्य क्षेत्रों तक विस्तार देने पर जोर दिया गया, ताकि किसान अधिक मूल्य वाली फसलों से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा सकें।

FPO प्रतिनिधियों को दी गई व्यवसाय और वित्तीय प्रबंधन की जानकारी

कार्यशाला में शामिल एफपीओ प्रतिनिधियों को केवल कृषि उत्पादन तक सीमित न रहते हुए व्यावसायिक दृष्टिकोण से काम करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। विशेषज्ञों ने उन्हें वित्तीय प्रबंधन, संस्थागत विकास, व्यवसाय विस्तार, मार्केटिंग रणनीति और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। इसके साथ बदलते बाजार की जरूरतों के अनुरूप काम करने और एफपीओ में किसानों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के उपाय भी बताए गए।

हर FPO तैयार करे वार्षिक बिजनेस प्लान

कार्यशाला के समापन पर उपायुक्त ने सभी किसान उत्पादक कंपनियों को नियमित रूप से बैठक आयोजित करने और अपनी गतिविधियों की लगातार समीक्षा करने का निर्देश दिया। उन्होंने एफपीओ को वार्षिक व्यवसायिक योजना तैयार करने, वित्तीय प्रगति की समीक्षा करने और कारोबार से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान कर उनके समाधान की रणनीति बनाने को कहा।

उपायुक्त ने कहा कि एफपीओ को मजबूत बनाने का अंतिम उद्देश्य किसानों की आय और बाजार तक उनकी पहुंच बढ़ाना है। इसलिए एफपीओ की व्यावसायिक सफलता का सीधा लाभ उससे जुड़े किसानों तक पहुंचना चाहिए।

विभागों के बीच समन्वय पर जोर

जिला प्रशासन ने एफपीओ को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया। कृषि उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और बिक्री तक एक मजबूत श्रृंखला तैयार करने की दिशा में संयुक्त प्रयास करने पर जोर दिया गया।

कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारी, JSLPS, प्रदान संस्था और पश्चिमी सिंहभूम जिले की किसान उत्पादक कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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