
झारखंड की बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव: हर विधानसभा क्षेत्र में बनेंगे कम-से-कम 5 नए पावर सब-स्टेशन

रांची: झारखंड में बिजली आपूर्ति को मजबूत करने और लो-वोल्टेज व ओवरलोडिंग जैसी समस्याओं से राहत दिलाने की दिशा में बड़ी तैयारी की जा रही है। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने राज्य के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम-से-कम पांच नए पावर सब-स्टेशन स्थापित करने की योजना तैयार की है।
इस योजना का सीधा फोकस उन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों पर है, जहां बढ़ती बिजली मांग के कारण मौजूदा वितरण व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। नए सब-स्टेशन बनने से बिजली वितरण का भार अलग-अलग क्षेत्रों में बांटा जा सकेगा और उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर बिजली आपूर्ति मिलने की उम्मीद है।
हर विधानसभा क्षेत्र पर फोकस
झारखंड में कुल 81 विधानसभा क्षेत्र हैं। यदि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में न्यूनतम पांच सब-स्टेशन बनाने की योजना पूरी तरह लागू होती है, तो इसका दायरा कम-से-कम 405 सब-स्टेशन तक पहुंच सकता है। हालांकि वास्तविक संख्या स्थान, आवश्यकता, तकनीकी सर्वेक्षण और जमीन की उपलब्धता के आधार पर तय होगी।
JBVNL ने अधिकारियों को प्रस्तावित सब-स्टेशनों के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान करने को कहा है। इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के साथ समन्वय करने पर जोर दिया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में Low Voltage की समस्या पर नजर
झारखंड के कई ग्रामीण इलाकों में लंबी वितरण लाइनों और बढ़ते लोड के कारण लो-वोल्टेज की समस्या सामने आती रही है। वहीं रांची समेत तेजी से विकसित हो रहे शहरी इलाकों में नए आवासीय क्षेत्र, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और बढ़ती बिजली खपत मौजूदा नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं।
नए पावर सब-स्टेशन बनने से वितरण लाइन की दूरी कम करने, ओवरलोडेड फीडरों पर दबाव घटाने और स्थानीय स्तर पर बिजली आपूर्ति बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
जमीन की उपलब्धता होगी महत्वपूर्ण
इस बड़ी योजना के सामने सबसे अहम चुनौती सब-स्टेशन के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध कराना है। यही कारण है कि अधिकारियों को जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से समन्वय कर जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा गया है।
योजना के जमीन पर उतरने के बाद इसका फायदा गांव से लेकर शहर तक बिजली उपभोक्ताओं को मिल सकता है। खासकर ऐसे इलाकों में जहां गर्मी या पीक आवर्स के दौरान बिजली का लोड बढ़ने से वोल्टेज और आपूर्ति प्रभावित होती है।




