सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ (Reservation Hatao Andolan – RHA) तेजी से चर्चा में है। छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि के बाद यह अभियान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से लोकप्रिय हुआ है। अभियान संचालकों का दावा है कि उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से महज पांच दिनों में 46 लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं । जानकारी के अनुसार, reservationhataomovement नाम से संचालित यह इंस्टाग्राम अकाउंट खुद को एक गैर-राजनीतिक नागरिक अभियान बताता है । अभियान का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन करना नहीं, बल्कि आरक्षण व्यवस्था में सुधार को लेकर सार्वजनिक बहस को आगे बढ़ाना है ।
अभियान के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 109 से अधिक पोस्ट साझा किए जा चुके हैं । रिपोर्ट के अनुसार, यह अकाउंट केवल भारतीय सेना (Indian Army) के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल को फॉलो करता है । प्रोफाइल में डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रसिद्ध नारे “Educate, Agitate, Organize” के साथ “सारी जाति एक समान, मेरा बस ये देश महान” और “जय हिंद” जैसे संदेश भी लिखे गए हैं ।
इस अभियान के तेजी से वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है । जहां कुछ लोग इस अभियान का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कई लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं और आरक्षण को सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण माध्यम बता रहे हैं ।
अभियान से जुड़े समूह ने कई प्रमुख मांगें सामने रखी हैं। इनमें कहा गया है कि यदि सरकार का उद्देश्य जाति आधारित भेदभाव समाप्त करना है, तो सार्वजनिक जीवन में जाति की पहचान का उपयोग समाप्त किया जाना चाहिए । समूह का यह भी कहना है कि सरकारी फॉर्म, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, सरकारी नौकरियों के आवेदन तथा अन्य सार्वजनिक प्रक्रियाओं में जाति का उल्लेख अनिवार्य नहीं होना चाहिए । इसके अलावा अभियान का दीर्घकालिक लक्ष्य “वन नेशन, वन आइडेंटिटी – इंडियन” की अवधारणा को बढ़ावा देना बताया गया है । अभियान के पोस्टरों और सोशल मीडिया संदेशों में “आरक्षण हटाओ, जाति हटाओ” जैसे नारे भी साझा किए जा रहे हैं ।
इस अभियान की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता यह भी दिखाती है कि सार्वजनिक नीतियों से जुड़े मुद्दे अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़े जनआंदोलन का रूप ले रहे हैं । बताया गया है कि इस अभियान की लोकप्रियता उस समय तेजी से बढ़ी, जब NEET परीक्षा विवाद और उसके बाद हुए छात्र आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी । इसी दौरान सोशल मीडिया पर कई नए डिजिटल अभियानों को भी व्यापक समर्थन मिला ।
हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये सभी मांगें अभियान से जुड़े समूह के दावे और विचार हैं । आरक्षण व्यवस्था से संबंधित किसी भी बदलाव के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया आवश्यक होती है । फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक नीति परिवर्तन घोषित नहीं किया गया है । फिलहाल यह अभियान सोशल मीडिया पर चल रहा एक नागरिक अभियान है, और इससे जुड़ी मांगें अभियान संचालकों के दावे हैं।
बाहरी संसाधन
- Hindustan Times: https://www.hindustantimes.com
- News18 Hindi: https://hindi.news18.com
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