JPSC Exam Scam झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में सीआईडी की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं, मूल्यांकन प्रक्रिया और अंक संशोधन से जुड़े कई गंभीर बिंदु सामने आए हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है। जांच में यह आरोप सामने आया है कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में कटिंग-छांट, ओवरराइटिंग और नंबरों में कथित हेरफेर किया गया। साथ ही मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान अंक बढ़ाने और कम करने से जुड़े मामलों की भी जांच की जा रही है।
JPSC Exam: CID जांच में क्या खुलासा हुआ?
सीआईडी की जांच के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में ऐसे परिवर्तन पाए गए, जिनकी वैधता की जांच की जा रही है। इसके अलावा मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेज, रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है। सीआईडी ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांगटे को 28 जुलाई को पूछताछ के लिए बुलाया है । खियांगटे ने कहा कि वह जांच एजेंसी का पूरा सहयोग करेंगे और जांच से यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा में कोई अनियमितता हुई या नहीं ।
जांच एजेंसी ने इस JPSC exam मामले में बीआईटी मेसरा, वीडियागेन टेक्नोलॉजी, सीएसआईआर-सीएमईआरआई (दुर्गापुर), गुजरात फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी तथा केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) जैसी संस्थाओं से तकनीकी और फोरेंसिक सहायता ली है। इस JPSC exam विवाद में अभी तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है ।
JPSC Exam: कॉपी मूल्यांकन और अंक संशोधन में गड़बड़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, JPSC exam के जांच के दौरान कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (OMR) शीट, बारकोड, हस्तलेखन, पेज क्रम और अंक प्रविष्टि से जुड़े पहलुओं की भी जांच की गई। विशेषज्ञों ने उत्तर पुस्तिकाओं के भौतिक और डिजिटल दोनों प्रकार के परीक्षण किए।
JPSC exam जांच में यह भी सामने आया कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) में मूल मूल्यांकन की तुलना में काफी अधिक अंक दिए गए। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में यह अंतर लगभग 80 प्रतिशत तक पाया गया, जिसकी जांच की जा रही है। इस JPSC exam के अतिरिक्त, प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा के अंकों के मिलान, दस्तावेजों के सत्यापन और परीक्षा प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की भी समीक्षा की जा रही है।
JPSC Exam: 14वीं सिविल सेवा परीक्षा का विवाद
JPSC exam का यह विवाद 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद शुरू हुआ। अभ्यर्थियों ने कई गंभीर आरोप लगाए, जिनमें श्रेणीवार कट-ऑफ अंक प्रकाशित न करना और मेरिट लिस्ट में संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर न होना शामिल है । इस JPSC exam में सोशल मीडिया पर OMR शीट वायरल होने के बाद विवाद और बढ़ गया, जिसमें एक अभ्यर्थी ने मात्र 48 प्रश्नों का उत्तर दिया था, जबकि क्वालीफाइंग मार्क्स 144 थे ।
JPSC exam के मामले में एक बड़ा खुलासा अभय तिवारी की गिरफ्तारी के साथ हुआ, जो गोड्डा के ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर थे और साथ ही परीक्षा आयोजन से जुड़ी निजी एजेंसी टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर भी थे । इस एजेंसी को पहले यूपी और झारखंड में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था ।
JPSC Exam: 9 परीक्षाएं स्थगित, छात्र आंदोलन तेज
इस JPSC exam विवाद के बाद आयोग ने 25 से 27 जुलाई तक प्रस्तावित मुख्य परीक्षा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया । साथ ही 2026 की अन्य सभी परीक्षाओं को भी रोक दिया गया । JPSC exam के इस मामले में कुल 9 भर्ती परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं ।
छात्र संगठनों ने इस JPSC exam मामले में सीबीआई जांच की मांग तेज कर दी है । प्रदर्शनकारी छात्रों ने पेपर लीक की घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
बाहरी संसाधन
- Jharkhand Public Service Commission (JPSC): https://jpsc.gov.in
- CID Jharkhand: https://cid.jharkhand.gov.in
- सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया: https://main.sci.gov.in


