25 बायोफ्लॉक टैंकों की योजना पर 60% तक अनुदान, पर्ल क्लस्टर के जरिए किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

हजारीबाग: सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभुकों तक पहुंच रहा है या नहीं, इसे लेकर कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के मत्स्य प्रभाग ने हजारीबाग जिले के नगवा और चुरचू गांव का दौरा किया। इस दौरान अधिकारियों ने योजनाओं से जुड़े लाभुकों से सीधे बातचीत की और उनके अनुभव, समस्याओं और योजनाओं से मिल रहे फायदे की जानकारी ली।

दौरे के दौरान बायोफ्लॉक योजना पर विशेष जोर रहा। इसके तहत 25 बायोफ्लॉक टैंकों की योजना पर करीब 25 लाख रुपये खर्च होने हैं। योजना में सरकार की ओर से 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। विभाग के मुताबिक, इस योजना से कई युवा मत्स्य पालन को रोजगार और स्वरोजगार के विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।
वहीं, हजारीबाग में विकसित हो रहे पर्ल क्लस्टर यानी मोती की खेती को भी बढ़ावा देने की तैयारी है। किसानों को मोती उत्पादन से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए सरकार की ओर से प्रति यूनिट 16 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।

विभाग का मानना है कि बायोफ्लॉक और मोती की खेती जैसी योजनाओं के जरिए गांवों में ही रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। आने वाले समय में मोती की खेती को और विस्तार देने के लिए नई कार्ययोजना तैयार करने की बात भी कही गयी है।
सरकार की कोशिश है कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि इसका सीधा फायदा अंतिम लाभुक तक पहुंचे और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिले।

