आज से सावन का पावन माह शुरू: चार सोमवारी में गूंजेगा हर-हर महादेव, शिवालयों में उमड़ेगी आस्था

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पहाड़ी मंदिर में सुबह 4:30 बजे से जलाभिषेक, श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था; 28 अगस्त को श्रावणी मेले का समापन

रांची: भगवान शिव की आराधना और भक्ति का पवित्र महीना सावन गुरुवार से शुरू हो रहा है। सावन की शुरुआत के साथ ही शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की उम्मीद है। गुरुवार को रात 8:35 बजे तक प्रतिपदा तिथि रहेगी, जिसके बाद द्वितीया तिथि शुरू होगी। इस वर्ष सावन में कुल चार सोमवारी पड़ेंगी, जबकि श्रावणी मेले का समापन 28 अगस्त को होगा।

शिवालयों में विशेष तैयारी, बाजारों में बढ़ी रौनक

सावन के स्वागत के लिए शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पहले दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं के जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए मंदिरों में विशेष इंतजाम किए गए हैं।

सावन शुरू होने से पहले बाजारों में भी रौनक देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए बेलपत्र, फूल, धूप, प्रसाद और अन्य पूजन सामग्री की खरीदारी की। फल-फूल और पूजा सामग्री की दुकानों पर भी लोगों की भीड़ रही।

पहाड़ी मंदिर में सुबह 4:30 बजे से जलाभिषेक

रांची के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर में सावन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशेष समय निर्धारित किया गया है। मंदिर में सुबह 4:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक जलाभिषेक किया जा सकेगा। इसके बाद दोपहर 1 से 2 बजे तक मंदिर के पट बंद रहेंगे।

दोपहर 2 बजे मंदिर के पट दोबारा खुलेंगे और रात 9 बजे तक श्रद्धालु दर्शन एवं पूजा कर सकेंगे। शाम 7:30 बजे संध्या आरती के साथ भगवान भोलेनाथ का विशेष शृंगार किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु शृंगार दर्शन कर सकेंगे। रात 9 बजे मंदिर के पट बंद होंगे और अगले दिन सुबह 4:30 बजे फिर खोले जाएंगे।

सफाई, लाइटिंग और पेयजल की व्यवस्था पर जोर

पहाड़ी मंदिर पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए मेयर रोशनी खलखो और डिप्टी मेयर नीरज कुमार ने बुधवार को मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मंदिर और आसपास तीन शिफ्ट में सफाई कराने के निर्देश दिए गए। श्रद्धालुओं के आवागमन वाले रास्तों पर पर्याप्त लाइटिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके अलावा जगह-जगह पेयजल के टैंकर और चलंत शौचालय लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।

सावन में क्यों बदल जाता है खान-पान?

सावन में सात्विक और हल्का भोजन करने की परंपरा धार्मिक आस्था से जुड़ी है। मानसून के दौरान पाचन संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है, इसलिए सामान्य तौर पर साफ, ताजा और सुपाच्य भोजन को प्राथमिकता देना उपयोगी माना जाता है।

कई श्रद्धालु इस महीने प्याज-लहसुन और मांसाहार से परहेज करते हुए सात्विक भोजन अपनाते हैं। फल, अनाज और अन्य संतुलित खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल किया जाता है। हालांकि भोजन का चुनाव व्यक्ति की सेहत और जरूरतों के अनुसार होना चाहिए।

सावन और हरे रंग का खास रिश्ता

सावन आते ही प्रकृति भी हरे रंग की चादर ओढ़ने लगती है। बारिश के कारण चारों ओर फैली हरियाली इस महीने की पहचान बन जाती है। धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में भी हरे रंग को सावन से विशेष रूप से जोड़ा जाता है। इस दौरान महिलाओं में हरी चूड़ियां पहनने और मेहंदी लगाने की परंपरा खास तौर पर देखने को मिलती है। इसे उमंग, सौभाग्य और प्रकृति के प्रति जुड़ाव के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

सावन की शुरुआत के साथ अब अगले 30 दिनों तक शिवालयों में पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिलेगा।

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