
बांस के धनुष से एशियाई खेलों के गोल्ड तक: जमशेदपुर की अंकिता भकत ने रचा इतिहास
भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर जीता स्वर्ण, अंकिता भकत की सटीक निशानेबाजी ने जीत में निभाई अहम भूमिका

जमशेदपुर: जमशेदपुर की टाटा आर्चरी अकादमी से निकली तीरंदाज अंकिता भकत ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। एशियाई खेल 2026 में भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। खिताबी मुकाबले में भारत ने मजबूत दक्षिण कोरियाई टीम को 5-3 से शिकस्त दी।
भारतीय टीम की इस ऐतिहासिक जीत में अंकिता भकत के साथ कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहड़ की भूमिका भी अहम रही। तीनों तीरंदाजों ने दबाव भरे मुकाबले में बेहतरीन तालमेल दिखाया और महत्वपूर्ण मौकों पर सटीक निशाने लगाकर भारत को जीत तक पहुंचाया।
दबाव के बीच अंकिता का शानदार प्रदर्शन
फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को दक्षिण कोरिया की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। मुकाबला जैसे-जैसे आगे बढ़ा, दोनों टीमों के बीच अंतर बेहद कम रहा। ऐसे समय में अंकिता भकत ने संयम बनाए रखा और अहम शॉट्स पर शानदार प्रदर्शन किया।
अंकिता की सटीक निशानेबाजी के साथ कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहड़ के मजबूत प्रदर्शन ने भारत को निर्णायक बढ़त दिलाई। आखिरकार भारतीय टीम ने 5-3 के स्कोर से मुकाबला अपने नाम कर स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया।
जमशेदपुर में खुशी का माहौल
भारतीय टीम की जीत के साथ ही जमशेदपुर और झारखंड में भी खुशी का माहौल है। टाटा आर्चरी अकादमी से जुड़ी अंकिता की इस उपलब्धि को राज्य के खेल जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
अंकिता की सफलता पर टाटा स्टील के खेल विभाग, अकादमी के प्रशिक्षकों और खेल प्रेमियों ने भारतीय टीम को बधाई दी। उनकी उपलब्धि ने एक बार फिर जमशेदपुर की तीरंदाजी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में ला दिया है।
बांस के धनुष से शुरू हुआ था सफर
अंकिता भकत की सफलता की कहानी उनकी शुरुआती मेहनत से जुड़ी है। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से आने वाली अंकिता ने करीब 10 वर्ष की उम्र में तीरंदाजी का अभ्यास शुरू किया था। शुरुआती दौर में वह साधारण बांस के धनुष से निशाना साधती थीं।
उनकी प्रतिभा को पहचान मिलने के बाद वर्ष 2014 में उनका चयन जमशेदपुर की टाटा आर्चरी अकादमी में हुआ। इसके बाद उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन मिला।
अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान अंकिता ने अपनी तकनीक और खेल क्षमता को लगातार बेहतर किया। राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अपनी पहचान बनाई।
झारखंड के लिए भी बड़ी उपलब्धि
अंकिता भकत की यह सफलता केवल उनके व्यक्तिगत करियर की उपलब्धि नहीं है, बल्कि झारखंड में तीरंदाजी की मजबूत परंपरा को भी नई पहचान देती है। जमशेदपुर लंबे समय से देश को प्रतिभाशाली तीरंदाज देने के लिए जाना जाता है।
बांस के साधारण धनुष से शुरू हुआ अंकिता का सफर अब एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक तक पहुंच चुका है। उनकी कहानी यह बताती है कि प्रतिभा, सही प्रशिक्षण और लगातार मेहनत के दम पर छोटे स्तर से शुरू हुआ सफर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकता है।




