Sugar prices rise: एक महीने में 35% महंगी हुई चीनी, Blinkit से DMart तक खरीद पर लगी लिमिट, जानें वजह
Sugar prices rise का सिलसिला पिछले कुछ हफ्तों में तेज हो गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत ₹48.18 प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो हो गई । और फिर 26 अगस्त तक यह ₹65.05 प्रति किलो तक पहुंच गई । यानी sugar prices rise की यह रफ्तार एक महीने में 35% से अधिक की बढ़ोतरी दर्शाती है।
Sugar prices rise: चीनी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
Sugar prices rise के कई कारण हैं, जिनमें उत्पादन में कमी, त्योहारी मांग, और सट्टेबाजी शामिल हैं।
उत्पादन में भारी कमी
सरकार के अनुसार, चालू सीजन (अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026) में चीनी का उत्पादन लगभग 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख टन था । यह 11% की कमी है। इसकी प्रमुख वजहें हैं:
- लाल सड़न (Red Rot) और तना छेदक (Top Borer) रोग: मुख्य गन्ना उत्पादक राज्यों में इन रोगों ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है ।
- अत्यधिक बारिश: बारिश के कारण गन्ने के खेतों में जलभराव की समस्या हुई, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ ।
त्योहारी मांग और सट्टेबाजी
Sugar prices rise में त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग का भी बड़ा हाथ है। गणेश चतुर्थी, दशहरा, दिवाली और शादी के सीजन में चीनी की खपत बढ़ जाती है । इसके अलावा, कुछ व्यापारियों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी भी की जा रही है, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो रही है ।
Sugar prices rise: क्या इथेनॉल नीति भी जिम्मेदार है?
विपक्ष ने sugar prices rise के लिए सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि गन्ने को इथेनॉल उत्पादन में डायवर्ट करने से चीनी की उपलब्धता कम हुई है ।
हालांकि, सरकार ने इस आरोप को खारिज कर दिया है। उसके अनुसार, इथेनॉल के लिए गन्ने का डायवर्जन पिछले सालों में कम हुआ है – 2022-23 में 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% हो गया है । इसके अलावा, अब लगभग 75% इथेनॉल मक्का (मेज़) से बन रहा है, न कि गन्ने से ।
Sugar prices rise: दुकानों पर लागू हुई खरीद सीमा
Sugar prices rise के चलते क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और बड़े रिटेल स्टोर्स ने प्रति ग्राहक चीनी खरीद की सीमा लागू कर दी है । यह कदम सीमित स्टॉक को नियंत्रित करने और जमाखोरी रोकने के लिए उठाया गया है ।
यहां कुछ प्लेटफॉर्म्स पर लागू सीमाएं दी गई हैं:
| प्लेटफॉर्म | खरीद सीमा |
|---|---|
| Blinkit (दिल्ली-एनसीआर) | 5 किलो के 1 पैक प्रति ट्रांजैक्शन |
| BigBasket | अधिकतम 6 किलो (6 × 1 किलो पैक) |
| Swiggy Instamart | 1 किलो के 2 पैक या 5 किलो के 1 पैक |
| DMart | 3 से 5 किलो प्रति इनवॉइस |
हालांकि, ये सीमाएं लोकेशन, ब्रांड और पैक साइज के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं ।
Sugar prices rise: सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं:
- शुल्क-मुक्त आयात: सरकार ने दस साल में पहली बार 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है ।
- स्टॉक सीमा: चीनी डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है, और बड़े उपभोक्ताओं को 15 दिनों से अधिक स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी ।
- जल्द शुरू होगी पेराई: चीनी मिलों को सलाह दी गई है कि वे 15 अक्टूबर 2026 से पेराई कार्य शुरू करें, जो सामान्य से पहले है ।
Sugar prices rise का यह संकट उत्पादन में कमी, त्योहारी मांग, और सट्टेबाजी के कारण पैदा हुआ है। सरकार ने आयात, स्टॉक सीमा और जल्द पेराई शुरू करने जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन तब तक sugar prices rise के दबाव में रहने की संभावना है । नई फसल अक्टूबर में आने के बाद कीमतों में थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है , लेकिन फिलहाल ग्राहकों को सीमित मात्रा में ही खरीदारी करनी पड़ रही है ।


