
रांची में जुटे 1000 से अधिक नेत्र विशेषज्ञ, आंखों के इलाज की नई तकनीकों और AI पर हुआ मंथन
होटल बीएनआर में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत, कॉर्निया, आंखों की चोट, दृष्टिहीनता और बढ़ते स्क्रीन टाइम पर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

रांची। राजधानी रांची में देशभर से आए 1000 से अधिक नेत्र विशेषज्ञों का जुटान हुआ है। होटल बीएनआर में तीन दिवसीय राष्ट्रीय नेत्र चिकित्सा सम्मेलन की शुरुआत हुई, जिसमें आंखों की बीमारियों के बेहतर इलाज, आधुनिक तकनीकों और चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर विशेषज्ञ चर्चा कर रहे हैं।
सम्मेलन के पहले दिन दृष्टिहीनता, आंखों की गंभीर चोट, कॉर्निया से जुड़ी बीमारी और बढ़ते स्क्रीन टाइम के कारण आंखों पर पड़ रहे प्रभाव जैसे विषयों पर अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए। सम्मेलन में एआइओएस के अध्यक्ष डॉ. जीवन तितियाल, निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. मोहन राजन, डॉ. चित्रा राममूर्ति और डॉ. नम्रता शर्मा समेत देश के कई प्रमुख नेत्र विशेषज्ञ शामिल हुए।
झारखंड से भी बड़ी संख्या में विशेषज्ञ सम्मेलन में पहुंचे। इनमें डॉ. जखनवाल, डॉ. सुजोय सामंत, डॉ. प्रीतिश प्रोनोय, डॉ. एनडी मिश्रा, डॉ. भारती कश्यप, डॉ. बीपी कश्यप, डॉ. विभूति कश्यप और डॉ. निधि गड़कर कश्यप समेत रिम्स और निजी अस्पतालों के नेत्र चिकित्सक शामिल हैं।
मोतियाबिंद सर्जरी की नई तकनीक पर जानकारी
सम्मेलन में डेफर्ड लाइव सर्जरी सेशन भी आयोजित किया गया। इसमें झारखंड की डॉ. निधि गड़कर कश्यप ने मोतियाबिंद सर्जरी में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीक के बारे में जानकारी साझा की। इसके अलावा देशभर से आए पीजी डॉक्टरों के लिए रिफ्रैक्टिव सर्जरी पर मास्टरक्लास भी आयोजित की गयी।
कार्यक्रम में अनप्लान्ड कट, साइंटिफिक ‘जोड़ी’ कॉम्पिटिशन, डॉ. आरपी टंडन एक्स्ट्रा म्यूरल ओरेशन, पर्ल्स ऑफ विजडम और हॉल ‘रीजेंसी’ जैसे वैज्ञानिक एवं अकादमिक कार्यक्रम भी हुए।
आंख में चोट को हल्के में न लें
विशेषज्ञों ने आंखों में होने वाली गंभीर चोट को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। उनका कहना है कि आंख में दर्द, लालिमा, रोशनी से परेशानी, नजर कम होना या कॉर्निया पर सफेद धब्बा जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
नेशनल आई बैंक, एम्स नई दिल्ली की चेयरपर्सन डॉ. नम्रता शर्मा ने बताया कि गंभीर चोट के बाद इलाज में देरी होने पर आंख की संरचना को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कॉर्नियल ब्लाइंडनेस को देश में दृष्टिहीनता की प्रमुख समस्याओं में से एक बताया।
नेत्रदान से लौट सकती है किसी की रोशनी
सम्मेलन में नेत्रदान को लेकर भी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार मृत्यु के बाद सामान्य तौर पर छह से आठ घंटे के भीतर कॉर्निया निकाली जा सकती है। कई परिस्थितियों में यह प्रक्रिया घर पर भी की जा सकती है।
उम्र अधिक होने, चश्मा लगाने या पहले मोतियाबिंद की सर्जरी हो जाने से नेत्रदान की संभावना अपने-आप खत्म नहीं होती। मृत्यु के बाद आई बैंक की टीम जांच के आधार पर अंतिम निर्णय लेती है।
विशेषज्ञों ने कहा कि नेत्रदान का संकल्प लेने वाले व्यक्ति के परिवार को भी इसकी जानकारी होना जरूरी है, क्योंकि मृत्यु के बाद समय पर आई बैंक को सूचना देना महत्वपूर्ण होता है। कॉर्निया ट्रांसप्लांट के जरिए कुछ मरीजों की रोशनी वापस लाने में नेत्रदान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं में AI और रोबोटिक सर्जरी पर जोर
सम्मेलन का उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह ने किया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में रोबोटिक सर्जरी शुरू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने सम्मेलन के आयोजन के लिए डॉ. बीपी कश्यप और डॉ. भारती कश्यप को बधाई दी।
युवा वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय मंच देने की पहल
आयोजन सचिव डॉ. भारती कश्यप ने कहा कि मिड-टर्म कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य मिड-टियर शहरों में मेडिकल शिक्षा, शोध और वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। रांची में इस सम्मेलन के आयोजन के पीछे युवा वैज्ञानिकों और चिकित्सकों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा और शोध प्रस्तुत करने का अवसर देना भी एक उद्देश्य है।
आयोजन के पहले दिन ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. बीपी कश्यप ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि झारखंड में इस स्तर के राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन की मेजबानी राज्य के लिए गौरव की बात है और इससे झारखंड की चिकित्सा शिक्षा व शोध गतिविधियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।
बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों के लिए चुनौती
नारायण नेत्रालय, बेंगलुरु के डॉ. रोहित शेट्टी ने बढ़ते स्क्रीन टाइम से आंखों पर पड़ने वाले असर के बारे में बताया। लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन देखने से पलक झपकाने की दर कम हो सकती है, जिससे आंखों में जलन, चुभन, सूखापन, पानी आना और कुछ समय के लिए धुंधला दिखने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
उन्होंने स्क्रीन इस्तेमाल करने वालों को 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी। इसके तहत हर 20 मिनट में करीब 20 सेकंड का ब्रेक लेकर लगभग 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखने की सलाह दी जाती है। साथ ही स्क्रीन इस्तेमाल करते समय कमरे में पर्याप्त रोशनी रखने और नियमित रूप से पलक झपकाने पर भी जोर दिया गया।




