झारखंड को ‘माइंस’ से ‘माइंड्स’ की ओर ले जाना हमारा संकल्प: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

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रांची: नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन 2026 के समापन सत्र में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के विकास का नया विजन प्रस्तुत करते हुए कहा कि राज्य की पहचान अब केवल खनिज संपदा (Mines) तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बौद्धिक क्षमता, रिसर्च और तकनीकी नवाचार (Minds) के दम पर झारखंड नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि राज्य को रिसर्च, इनोवेशन और आधुनिक तकनीक का हब बनाने की दिशा में सरकार दीर्घकालिक योजनाओं पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत, तकनीकी विशेषज्ञों, निवेशकों, पर्यटन क्षेत्र के प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड में अब केवल नीतियां नहीं बन रहीं, बल्कि विकास की नई संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य को सतत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाना और वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाना है। कार्यक्रम के दौरान झारखंड सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), तकनीकी नवाचार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए जिंदल ग्रुप, टाटा समूह, गूगल, वरुण बेवरेजेस, ईज माय ट्रिप, जनरल स्टील, पावर न्यूक्लियर समेत कई राष्ट्रीय और वैश्विक संस्थाओं के साथ कुल 14 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा विभिन्न विभागों की ड्राफ्ट नीतियों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये एमओयू केवल औपचारिक समझौते नहीं हैं, बल्कि झारखंड के भविष्य की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा, “ये सिर्फ एग्रीमेंट नहीं, बल्कि हमारी उपलब्धियां हैं। ये केवल पॉलिसी नहीं, बल्कि झारखंड के विकास की नई संभावनाएं हैं।” उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि सरकार शॉर्ट-टर्म योजनाओं के बजाय लॉन्ग-टर्म पार्टनरशिप पर काम कर रही है। इसलिए सभी परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर धरातल पर उतारना सुनिश्चित किया जाए ताकि निवेश का लाभ सीधे जनता तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने आदिवासी समुदाय के आर्थिक सशक्तिकरण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने जियाडा (JIADA) की औद्योगिक नीति में आदिवासी उद्यमियों को दी जा रही 25 प्रतिशत रियायत का उल्लेख करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक किए जाने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य की आत्मा उसके आदिवासी समाज में बसती है और विकास की मुख्यधारा में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि अतीत में प्रभावी संवाद की कमी के कारण झारखंड की वास्तविक क्षमता दुनिया के सामने पूरी तरह नहीं आ सकी। उन्होंने कहा कि अब सरकार निवेशकों, उद्योग जगत और वैश्विक संस्थाओं के साथ निरंतर संवाद बनाए रखेगी ताकि झारखंड निवेश और नवाचार का पसंदीदा गंतव्य बन सके। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्यक्रम में शामिल केंद्रीय मंत्रियों, उद्योग प्रतिनिधियों, तकनीकी विशेषज्ञों, निवेशकों और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने ‘जोहार’ के साथ अपने संबोधन का समापन करते हुए सभी से झारखंड के विकास की इस यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान किया।

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