झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट ने एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (AME) और एयर होस्टेस प्रशिक्षण के लिए दो संस्थानों के साथ एमओयू किया है। मुख्यमंत्री स्थापना दिवस पर नवंबर में दोनों कोर्स शुरू होंगे। पूर्वी भारत में सरकारी स्तर पर यह सुविधा देने वाला झारखंड पहला राज्य बनेगा।

रांची: झारखंड के युवाओं के लिए एविएशन सेक्टर में करियर बनाने का बड़ा अवसर सामने आया है। झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट में पहली बार सरकारी स्तर पर एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (AME) और एयर होस्टेस प्रशिक्षण की शुरुआत होने जा रही है। दोनों पाठ्यक्रमों का शुभारंभ नवंबर में मुख्यमंत्री स्थापना दिवस के अवसर पर किया जाएगा। इन पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए फ्लाइंग इंस्टीट्यूट ने दिल्ली की मेसर्स वेन्योर के साथ AME कोर्स और भोपाल की AISECT लिमिटेड के साथ एयर होस्टेस प्रशिक्षण के लिए एमओयू किया है। इसके साथ ही झारखंड पूर्वी भारत का पहला राज्य बन जाएगा, जहां सरकारी स्तर पर ये दोनों एविएशन कोर्स उपलब्ध होंगे।
AME कोर्स का संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर होगा, जिससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। इस कोर्स में 60 सीटें उपलब्ध रहेंगी। वहीं एयर होस्टेस के 6 महीने और 12 महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी 60-60 सीटें निर्धारित की गई हैं। इन पाठ्यक्रमों की शुरुआत डीजीसीए (DGCA) की मंजूरी मिलने के बाद की जाएगी। फ्लाइंग इंस्टीट्यूट आधारभूत संरचना उपलब्ध कराएगा, जबकि संचालन की जिम्मेदारी साझेदार संस्थाओं के पास होगी। इससे संस्थान को आर्थिक लाभ भी मिलेगा और राज्य के युवाओं को दूसरे राज्यों में महंगे कोर्स करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
फीस की बात करें तो तीन वर्षीय AME कोर्स के लिए कुल 6 लाख रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसे तीन साल में दो-दो लाख रुपये की किस्तों में जमा करना होगा। वहीं 6 महीने के एयर होस्टेस कोर्स की फीस 1.05 लाख रुपये और 12 महीने के डिप्लोमा कोर्स की फीस 1.55 लाख रुपये तय की गई है। इस शुल्क में ड्रेस, ग्रूमिंग किट और स्विमिंग प्रशिक्षण भी शामिल रहेगा।
एयर होस्टेस कोर्स में प्रवेश के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 30 जुलाई निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के प्रबंध निदेशक कैप्टन एस.पी. सिन्हा के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर राज्य में एविएशन क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है। उनका कहना है कि ये दोनों पाठ्यक्रम झारखंड के युवाओं के लिए रोजगार और करियर के नए अवसर खोलेंगे तथा राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होंगे।

