झारखंड में SIR अभियान अंतिम दौर में, डिजिटाइजेशन में पाकुड़ अव्वल तो रांची सबसे पीछे

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झारखंड में SIR अभियान के तहत 98.51% मतदाताओं तक गणना प्रपत्र (EF) पहुंच चुके हैं, लेकिन अब तक केवल 75.47% फॉर्म का डिजिटाइजेशन हो सका है। पाकुड़ 86.54% डिजिटाइजेशन के साथ पहले स्थान पर है, जबकि रांची 66.64% के साथ राज्य में सबसे पीछे है।

रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। अभियान समाप्त होने में अब केवल आठ दिन शेष हैं। राज्यभर में गणना प्रपत्र यानी Enumeration Forms (EF) का वितरण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन फॉर्म के डिजिटाइजेशन की गति अभी भी तय लक्ष्य से पीछे चल रही है। 22 जुलाई की शाम 6 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 2 करोड़ 64 लाख 63 हजार 236 मतदाताओं में से 2 करोड़ 60 लाख 67 हजार 739 मतदाताओं तक EF का वितरण किया जा चुका है। यह कुल मतदाताओं का 98.51 प्रतिशत है। वहीं, अब तक 1 करोड़ 99 लाख 72 हजार 689 फॉर्म का डिजिटाइजेशन हुआ है, जो कुल मतदाताओं का 75.47 प्रतिशत है।

राज्यभर में तैनात 29,571 बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अब अंतिम आठ दिनों में शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन पूरा करने के लक्ष्य के साथ घर-घर जाकर भरे हुए फॉर्म एकत्र कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, कई क्षेत्रों में मतदाताओं द्वारा समय पर फॉर्म वापस जमा नहीं करने के कारण डिजिटाइजेशन की गति प्रभावित हुई है। कई BLO को एक ही परिवार के पास कई बार जाना पड़ रहा है।

जिलावार प्रदर्शन की बात करें तो पाकुड़ ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 86.54 प्रतिशत डिजिटाइजेशन के साथ पहला स्थान हासिल किया है। इसके बाद कोडरमा (85.22%) और लोहरदगा (84.31%) दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। वहीं राजधानी रांची इस अभियान में सबसे पीछे है। यहां 94.29 प्रतिशत मतदाताओं तक फॉर्म तो पहुंचाए गए, लेकिन केवल 66.64 प्रतिशत फॉर्म का ही डिजिटाइजेशन हो पाया है। पूर्वी सिंहभूम (67.76%) और धनबाद (70.25%) भी राज्य के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल हैं।

दूसरी ओर, दुमका, लातेहार, सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम, पलामू, गढ़वा, रामगढ़ और हजारीबाग जैसे कई जिलों ने 75 से 80 प्रतिशत या उससे अधिक डिजिटाइजेशन पूरा कर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। अब अभियान के अंतिम आठ दिनों में चुनाव आयोग और जिला प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती शत-प्रतिशत फॉर्म संग्रह और डिजिटाइजेशन पूरा करना है, ताकि झारखंड की मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण तय समय सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके।

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