Jharkhand Mining Law: नए खनन कानून से 14 हजार करोड़ का नुकसान! वित्त मंत्री ने जताई आपत्ति

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Jharkhand Mining Law: नए खनन कानून से 14 हजार करोड़ का नुकसान! वित्त मंत्री ने जताई आपत्ति

Jharkhand Mining Law को लेकर राज्य में सियासी और आर्थिक विरोध तेज होता दिख रहा है। केंद्र सरकार के खान-खनिज विकास संशोधन अधिनियम-2026 (MMDR Amendment Act) के खिलाफ झारखंड सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का दावा है कि इस Jharkhand Mining Law की वजह से राज्य को हर साल 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है और इसका असर 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि पर भी पड़ सकता है 


क्या है Jharkhand Mining Law जिसने मचाया है बवाल?

Jharkhand Mining Law यानी खान-खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन अधिनियम-2026 को 18 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और यह 23 अगस्त 2026 से लागू हो गया । इस Jharkhand Mining Law के तहत केंद्र सरकार ने खनिज अधिकारों और खनिजयुक्त भूमि पर राज्यों द्वारा कर, सेस या अन्य शुल्क लगाने पर बड़ी पाबंदी लगा दी है 

Jharkhand Mining Law में एक नई धारा 9-डी जोड़ी गई है, जो कहती है कि राज्य सरकारें खनिज अधिकारों या खनिजयुक्त भूमि पर कोई कर, सेस या अन्य शुल्क नहीं लगा सकेंगी, सिवाय उन शर्तों के जो केंद्र सरकार तय करेगी । इस Jharkhand Mining Law में यह भी प्रावधान है कि अगर कोई राज्य इस अधिनियम से पहले ऐसा कोई कर वसूल नहीं कर पाया है, तो वह अब अमान्य माना जाएगा 

वित्त मंत्री ने Jharkhand Mining Law पर क्या कहा?

Jharkhand Mining Law का विरोध करते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि इस कानून से झारखंड जैसे खनिज संपन्न राज्यों के राजस्व पर सीधा असर पड़ेगा । उन्होंने Jharkhand Mining Law को राजकोषीय संघवाद और संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया 

वित्त मंत्री के अनुसार, Jharkhand Mining Law से राज्य पर 22 से 25 हजार करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि GST से करीब 4 हजार करोड़ रुपये और वीबी-जी रामजी योजना के तहत करीब 8 हजार करोड़ रुपये का बोझ पहले से ही राज्य पर है, और Jharkhand Mining Law से यह बोझ और बढ़ जाएगा 

Jharkhand Mining Law से क्या होगा नुकसान?

Jharkhand Mining Law के विरोधियों का कहना है कि इससे राज्य को कई स्तरों पर नुकसान होगा:

1. राजस्व में भारी गिरावट – मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि Jharkhand Mining Law से राज्य को 11 हजार करोड़ रुपये सालाना का नुकसान हो सकता है । उन्होंने बताया कि झारखंड के अपने गैर-कर राजस्व का 84.9% खनन से आता है 

2. कल्याणकारी योजनाओं पर खतरा – Jharkhand Mining Law के कारण मुख्यमंत्री मैयां सम्मान योजना, आबुआ आवास, पेंशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाओं पर संकट आ सकता है 

3. बकाया राशि पर प्रभाव – वित्त मंत्री ने Jharkhand Mining Law के कुछ प्रावधानों को लेकर चिंता जताई कि इसका असर कोयला कंपनियों से राज्य की 1,36,042 करोड़ रुपये की बकाया राशि की वसूली पर पड़ सकता है 

4. मिनरल बेयरिंग लैंड सेस – राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले के बाद Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Act-2024 पारित किया था, जिससे 2026-27 में 14 हजार करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद थी । Jharkhand Mining Law इस संभावित आय को खत्म कर सकता है।

Jharkhand Mining Law का झारखंड के लिए क्या मतलब है?

Jharkhand Mining Law के तहत अब राज्य को खनिजों पर कर लगाने के लिए केंद्र की अनुमति और उसकी शर्तों पर निर्भर रहना पड़ेगा । वित्त मंत्री का कहना है कि Jharkhand Mining Law से राज्य की वित्तीय स्वायत्तता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है 

झारखंड के पास देश के 40% खनिज संसाधन हैं, और राज्य का खनन क्षेत्र यहां की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है । Jharkhand Mining Law के विरोधियों का तर्क है कि जिस राज्य की जमीन से खनिज निकाले जा रहे हैं और जिसे पर्यावरणीय व सामाजिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, उसे राजस्व के अधिकारों से वंचित करना उचित नहीं है 

Jharkhand Mining Law पर सरकार का पक्ष

Jharkhand Mining Law का बचाव करते हुए केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य खनन क्षेत्र में स्थिरता, निश्चितता और पूर्वानुमेयता लाना है । उन्होंने Jharkhand Mining Law के बारे में कहा कि यह राज्यों के अधिकारों का हनन नहीं करता, बल्कि समान कर दरों के लिए जरूरी है 

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने Jharkhand Mining Law को सही ठहराते हुए कहा कि यह कानून 1956-57 के पुराने कानून पर आधारित है और इसे झारखंड के लोगों की सुरक्षा, रोजगार और प्रवासन रोकने के लिए लाया गया है 

Jharkhand Mining Law के खिलाफ क्या होगी कार्रवाई?

Jharkhand Mining Law के खिलाफ झारखंड सरकार ने आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने Jharkhand Mining Law को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है और चेतावनी दी है कि अगर इस Jharkhand Mining Law को नहीं हटाया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा 

JMM ने Jharkhand Mining Law को “काला कानून” करार दिया है और इसके खिलाफ जन जागरण, बंद और यदि आवश्यक हो तो आर्थिक नाकेबंदी करने की बात कही है । Jharkhand Mining Law के खिलाफ पार्टी का कहना है कि वह इसे सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती देगी 


Jharkhand Mining Law एक ऐसा मुद्दा बन गया है, जिस पर राज्य की सरकार और केंद्र सरकार के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। Jharkhand Mining Law से जुड़े इस विवाद का अंत क्या होगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल, इस Jharkhand Mining Law के खिलाफ राज्य में विरोध तेज होता दिख रहा है और सरकार इसे संवैधानिक और कानूनी स्तर पर चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

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