E20+ Petrol ईंधन में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ाने को लेकर भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि अभी पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलाने पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 20 जुलाई 2026 को राज्यसभा में लिखित उत्तर देते हुए कहा कि अगर भविष्य में मिश्रण बढ़ाने का कोई प्रस्ताव आता है, तो उसे वैज्ञानिक अध्ययन और ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तेल कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों के परामर्श के बाद ही लागू किया जाएगा।
हालांकि, इसके साथ ही सरकार ने यह भी बताया कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) के लिए E85 ईंधन (85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल) उपलब्ध कराया गया है, लेकिन यह देशव्यापी बेस एथेनॉल मिश्रण स्तर में बढ़ोतरी नहीं है। यानी E20+ यानी 20% से अधिक एथेनॉल मिश्रण फिलहाल सामान्य पेट्रोल के लिए लागू नहीं है।
E20 लक्ष्य समय से पांच साल पहले हासिल
गोपी ने बताया कि भारत ने 2030 के मूल लक्ष्य से पांच साल पहले ही 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया है। 2013-14 में औसत एथेनॉल मिश्रण सिर्फ 1.53 प्रतिशत था, जो 2025-26 की आपूर्ति अवधि में बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है। सरकार ने इसे ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि बताया है।
E20 कार्यक्रम के फायदे
2014-15 से शुरू हुए इस कार्यक्रम ने कई बड़े आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ दिए हैं। सरकार ने बताया कि:
- कच्चे तेल के आयात में लगभग 316 लाख टन की कमी आई
- 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई
- करीब 952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई
- किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय हुई
E20 पेट्रोल सुरक्षित और प्रभावी
सरकार ने E20 पेट्रोल को पूरी तरह सुरक्षित बताया है। 20 करोड़ से अधिक दोपहिया और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें E15+ और E19-E20 ईंधन का उपयोग कर रही हैं, बिना किसी बड़े इंजन खराब होने की शिकायत के। एक प्रमुख चार पहिया वाहन निर्माता ने 2.84 करोड़ वाहनों के सर्विस डेटा में E20 से कोई इंजन क्षति नहीं पाई।
पुराने वाहनों (E10 के लिए डिज़ाइन किए गए) में माइलेज में 3-5 प्रतिशत की मामूली कमी आ सकती है, लेकिन E20 में हायर-ऑक्टेन रेटिंग और क्लीनर कंबशन होता है।
E85 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए उपलब्ध
सरकार ने स्पष्ट किया कि E85 (85% एथेनॉल) ईंधन केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए उपलब्ध है और यह सामान्य पेट्रोल के लिए E20+ का विस्तार नहीं है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने से पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने और जैव ईंधन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं
सरकार ने यह भी बताया कि E20 कार्यक्रम से खाद्य सुरक्षा प्रभावित नहीं हुई है। एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल अतिरिक्त अनाज का उपयोग किया जाता है। मक्का की हिस्सेदारी गन्ने से अलग कर 2025-26 में 37 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है, जो 2021-22 में शून्य थी।
E20+ पर आगे की राह
सरकार ने साफ किया है कि भविष्य में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण (E20+) के लिए कोई योजना नहीं है। कोई भी फैसला ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तेल कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों के विस्तृत अध्ययन के बाद ही लिया जाएगा। फिलहाल E20 पेट्रोल के साथ आगे बढ़ना और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है।
बाहरी संसाधन
- पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय: https://mopng.gov.in
- NITI Aayog – Ethanol Blending: https://www.niti.gov.in
- सरकारी प्रेस विज्ञप्ति: https://www.pib.gov.in


