सोहराई भित्ति चित्रों से संवर रहा गांव, आदिवासी कला और प्रकृति पर्यटन को मिलेगा नया मंच

जमशेदपुर: झारखंड के दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य (Dalma Wildlife Sanctuary) में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। वन विभाग अब चाकुलिया गांव को पर्यावरण पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत गांव में होमस्टे योजना शुरू करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि पर्यटक स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता का करीब से अनुभव कर सकें।
इस पहल के तहत गांव की दीवारों को पारंपरिक सोहराई भित्ति चित्रों से सजाया जा रहा है। स्थानीय आदिवासी कलाकार प्राकृतिक रंगों की मदद से हाथी, वन्यजीव, पक्षियों, जंगल और प्रकृति से जुड़े पारंपरिक चित्र उकेर रहे हैं। इन कलाकृतियों ने पूरे गांव को नया आकर्षण दिया है और पर्यटकों के लिए इसे एक खास सांस्कृतिक गंतव्य बनाने की दिशा में काम शुरू हो चुका है।
दलमा के डीएफओ सबा आलम ने बताया कि विभाग का उद्देश्य झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को वन्यजीव पर्यटन के साथ जोड़ते हुए चाकुलिया गांव को एक आदर्श इको-टूरिज्म मॉडल के रूप में विकसित करना है। वन विभाग के अनुसार, करीब 18 से 20 घरों वाला यह गांव दलमा पहाड़ियों की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित है, जिससे यह पर्यटकों के ठहरने और प्रकृति आधारित पर्यटन के लिए उपयुक्त स्थान बनता है। प्रस्तावित होमस्टे योजना से स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार और आय के नए अवसर भी मिलेंगे।
गांव के निवासी और पर्यावरण ग्राम समिति (EVC) के सदस्य बिष्णु हांसदा का कहना है कि यह पहल केवल सोहराई कला को संरक्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय कलाकारों को सशक्त बनाने और पर्यटन के माध्यम से ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने का भी माध्यम बनेगी। वन विभाग का मानना है कि जैव विविधता संरक्षण और आदिवासी संस्कृति का संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। इस तरह की पहल से स्थानीय समुदाय और संरक्षण प्रयासों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा, वहीं पर्यटकों को दलमा की प्राकृतिक सुंदरता के साथ झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।

