मोरहाबादी में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी ने फहराया तिरंगा, युवाओं और परीक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा संदेश

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80वें स्वतंत्रता दिवस पर मोरहाबादी मैदान से मुख्यमंत्री जी ने शहीदों को किया नमन, अगले 25 साल के झारखंड का विजन बताया; रोजगार, शिक्षा, संस्कृति और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था पर दिया जोर

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में 80वें स्वतंत्रता दिवस का मुख्य राजकीय समारोह आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राज्यवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और झारखंड के अमर नायकों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री जी ने महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर समेत देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। साथ ही भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव, तिलका मांझी, फूलो-झानो, नीलांबर-पीतांबर और शेख भिखारी जैसे झारखंड के वीरों को भी नमन किया।

‘स्वतंत्रता का मतलब हर व्यक्ति को समान अवसर’

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आजादी का अर्थ सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है। वास्तविक स्वतंत्रता तब होगी, जब हर बच्चे को बेहतर शिक्षा, हर युवा को रोजगार, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर और किसानों को समृद्ध जीवन मिल सके।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को समान अवसर, सम्मान और न्याय के साथ जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए। भारत स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, जबकि झारखंड अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर चुका है। ऐसे में राज्य के सामने अब अगले 25 वर्षों के विकास की दिशा तय करने की जिम्मेदारी है।

‘जल-जंगल-जमीन हमारी पहचान’

मुख्यमंत्री जी ने झारखंड की संस्कृति और प्राकृतिक विरासत को राज्य की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की परंपरा झारखंड की सभ्यता का हिस्सा रही है।

उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया सतत विकास की बात कर रही है, जबकि झारखंड की पारंपरिक जीवनशैली पहले से ही प्रकृति के साथ संतुलन का संदेश देती रही है। राज्य के महान जननायकों ने सम्मान, समानता, सामुदायिक भागीदारी और प्रकृति संरक्षण पर आधारित समाज का सपना देखा था।

अगले 25 साल के झारखंड का विजन

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आने वाले 25 वर्षों में ऐसा झारखंड तैयार करना है, जहां युवा शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ें। राज्य की भाषाओं, साहित्य, लोक कला, संगीत और सांस्कृतिक विरासत को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लाख, तसर, बांस, मिलेट, औषधीय पौधों और लघु वनोपज को सिर्फ पारंपरिक आजीविका तक सीमित नहीं रखा जाएगा। वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग और बेहतर बाजार उपलब्ध कराकर इनसे ग्रामीण परिवारों और ग्राम सभाओं की आय बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि झारखंड में विकास का मतलब सिर्फ खनिज संसाधनों का दोहन नहीं है। मानव संसाधन, प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत के बीच संतुलन बनाकर विकास का मॉडल तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।

युवाओं को बताया विकसित झारखंड की असली ताकत

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी ने राज्य के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड की विरासत राज्य को पहचान देती है, लेकिन युवा उस पहचान को भविष्य की दिशा देते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की शिक्षा, कौशल, आत्मविश्वास और उनके सपने ही आने वाले समय के झारखंड की सबसे बड़ी पूंजी हैं। राज्य के लाखों युवा अपने भविष्य के लिए मेहनत कर रहे हैं और उनके माता-पिता भी अपनी क्षमता से अधिक प्रयास करके उन्हें पढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि युवाओं की मेहनत का सम्मान हो और उनकी प्रतिभा के साथ न्याय किया जाए।

भर्ती परीक्षाओं पर बोले CM- ‘युवाओं का विश्वास सबसे जरूरी’

भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री जी ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने का असर केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे पूरी पीढ़ी का भरोसा प्रभावित होता है। उन्होंने राज्य के विद्यार्थियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उनकी मेहनत को किसी भ्रष्ट व्यवस्था या अनियमितता के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि देश के कई हिस्सों में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं, लेकिन दूसरे राज्यों की स्थिति झारखंड की जिम्मेदारी को कम नहीं करती। राज्य सरकार के लिए झारखंड के युवाओं का भविष्य और उनका भरोसा सबसे महत्वपूर्ण है।

दोषियों पर होगी कार्रवाई, बिना प्रमाण किसी को नहीं ठहराएंगे दोषी

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि परीक्षा से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावशाली व्यक्ति होने के बावजूद यदि किसी की संलिप्तता साबित होती है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।

हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बिना प्रमाण किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने की राजनीति नहीं होनी चाहिए। सरकार का उद्देश्य जांच को निष्पक्ष रखना और दोषी के खिलाफ कार्रवाई करना है।

वार्षिक परीक्षा कैलेंडर से लेकर OMR तक बदलाव

मुख्यमंत्री जी ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार समयबद्ध वार्षिक परीक्षा कैलेंडर लागू करने, तकनीकी रूप से सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम करेगी।

इसके अलावा उत्तर कुंजी और OMR शीट को समय पर उपलब्ध कराने तथा परीक्षा प्रक्रिया में बहुस्तरीय जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री जी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में जहां झारखंड की संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और अगले 25 वर्षों के विकास का विजन सामने आया, वहीं भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं के बीच भरोसा कायम करने और परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का संदेश भी प्रमुख रहा।

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