केंद्र सरकार ने एक्सपोर्ट ड्यूटी में किया बदलाव, 15 से 31 अगस्त तक लागू रहेंगी नई दरें; घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा सीधा असर

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की ओर से 14 अगस्त को जारी अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) को अब शून्य कर दिया गया है। नई दरें 15 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। सरकार ने सिर्फ पेट्रोल पर ही राहत नहीं दी है, बल्कि डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के निर्यात शुल्क में भी कटौती की है।
डीजल और ATF पर भी घटा एक्सपोर्ट टैक्स
नई व्यवस्था के तहत डीजल के निर्यात पर SAED को 25.5 रुपये से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, विमानन ईंधन यानी ATF पर निर्यात शुल्क को 22 रुपये से घटाकर 19.5 रुपये प्रति लीटर किया गया है। ये नई दरें फिलहाल 15 अगस्त से 31 अगस्त तक लागू रहेंगी।
सरकार ने क्यों बदला एक्सपोर्ट टैक्स?
केंद्र सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाए जाने वाले निर्यात शुल्क की समय-समय पर समीक्षा करती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग मार्जिन और देश में ईंधन की उपलब्धता जैसे कारकों को ध्यान में रखकर दरों में बदलाव किया जाता है। मौजूदा बदलाव भी वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों और घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
क्या है विंडफॉल टैक्स?
वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर मार्जिन मिलने की स्थिति बनी थी।
ऐसे समय में सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और रिफाइनरी कंपनियों को होने वाले असाधारण मुनाफे पर नियंत्रण रखने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया था। बाद में इसकी दरों में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव किए जाते रहे।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
सबसे अहम बात यह है कि इस फैसले का घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। वित्त मंत्रालय का यह बदलाव सिर्फ निर्यात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों से संबंधित है। घरेलू बिक्री पर लागू मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में इस अधिसूचना के जरिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए पेट्रोल पंप पर आम उपभोक्ताओं को मिलने वाले पेट्रोल और डीजल के दाम पर इस फैसले का तत्काल सीधा असर नहीं माना जा रहा है।
15 दिन बाद फिर हो सकती है समीक्षा
सरकार पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क की समीक्षा नियमित अंतराल पर करती है। ऐसे में 31 अगस्त के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग मार्जिन और घरेलू ईंधन की जरूरतों को देखते हुए दरों में दोबारा बदलाव किया जा सकता है।
यानी फिलहाल पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर अतिरिक्त शुल्क शून्य कर दिया गया है, जबकि डीजल और ATF पर भी शुल्क कम हुआ है। आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार की स्थिति के आधार पर सरकार का अगला फैसला सामने आ सकता है।

