UNSC की 38वीं रिपोर्ट में AQIS की बढ़ती गतिविधियों पर जताई चिंता, छोटे सेल और गुप्त नेटवर्क के जरिए विस्तार का दावा

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पिछले साल नवंबर में हुए लाल किला विस्फोट को लेकर संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद-रोधी प्रतिबंध व्यवस्था के तहत तैयार की गई 38वीं रिपोर्ट में अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट यानी AQIS को इस हमले के लिए जिम्मेदार बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास ट्रैफिक सिग्नल पर धीमी गति से चल रही एक कार में जोरदार विस्फोट हुआ था। इस घटना में करीब 15 लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति को सौंपी गई रिपोर्ट में AQIS की गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि संगठन अब केवल किसी एक इलाके तक सीमित रहने के बजाय छोटे-छोटे समूहों और विकेंद्रीकृत नेटवर्क के जरिए अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
बांग्लादेश में नेटवर्क फैलाने की कोशिश

रिपोर्ट में AQIS की बांग्लादेश में मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश को लेकर भी चिंता जताई गई है। संयुक्त राष्ट्र के आकलन के अनुसार, संगठन स्थानीय परिस्थितियों का फायदा उठाकर वहां अपने नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश कर सकता है।
रिपोर्ट में अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े संगठनों की रासायनिक और जैविक हथियारों में लंबे समय से दिलचस्पी का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, तकनीकी और अन्य चुनौतियों के कारण इन संगठनों को इस दिशा में अब तक बड़ी सफलता नहीं मिल पाई है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2025 के आखिर में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें एक चिकित्सक भी शामिल था। आरोप था कि विदेश में सक्रिय आईएसआईएल से जुड़े एक समूह ने उन्हें राइसिन विकसित करने का काम सौंपा था।
दक्षिण एशिया में बढ़ा क्षेत्रीय तनाव
रिपोर्ट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार जारी हमलों का भी उल्लेख किया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इन घटनाओं के चलते दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है।
क्या है AQIS?
अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट यानी AQIS, अल-कायदा का दक्षिण एशिया केंद्रित आतंकी संगठन है। इसका नेटवर्क भारत समेत अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान और म्यांमार जैसे देशों से जुड़ा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की पिछली रिपोर्टों में संगठन के नेतृत्व और लड़ाकों की संख्या को लेकर भी जानकारी सामने आई थी। 2021 के आकलन में ओसामा महमूद को AQIS का प्रमुख और अतीफ याह्या गौरी को उसका उपनेता बताया गया था। उस समय संगठन में करीब 200 से 400 लड़ाकों के होने का अनुमान लगाया गया था।
AQIS की गतिविधियां उस दौर में मुख्य रूप से अफगानिस्तान के कुछ प्रांतों में बताई गई थीं। संगठन के लड़ाके तत्कालीन अफगान सरकार के खिलाफ तालिबान के साथ मिलकर लड़ रहे थे।
बदला AQIS का ऑपरेशन मॉडल
संयुक्त राष्ट्र की पुरानी और ताजा रिपोर्ट की तुलना करें तो AQIS के काम करने के तरीके में बदलाव दिखाई देता है। पहले संगठन के लड़ाकों की संख्या, नेतृत्व और अफगानिस्तान में उसकी मौजूदगी पर ज्यादा जोर था।
वहीं, नई रिपोर्ट में छोटे सेल, लॉजिस्टिक्स सिस्टम और वित्तीय नेटवर्क पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। यानी अब AQIS को एक बड़े और केंद्रीकृत आतंकी संगठन के बजाय छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए गतिविधियां संचालित करने वाले क्षेत्रीय आतंकी संगठन के तौर पर देखा जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र का यह आकलन दक्षिण एशिया में सक्रिय आतंकी संगठनों के बदलते तौर-तरीकों और उनके नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के सामने मौजूद चुनौती को भी रेखांकित करता है।

