
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए रांची ने बढ़ाए कदम, वॉकाथॉन में जुटे करीब तीन हजार लोग
वन विभाग के आयोजन में विद्यार्थियों, युवाओं और प्रकृति प्रेमियों ने लिया हिस्सा; वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों को बचाने की अपील

रांची: वन्यजीवों की सुरक्षा और जैव-विविधता के संरक्षण का संदेश लेकर रविवार को राजधानी की सड़कों पर करीब ढाई से तीन हजार लोगों ने पदयात्रा की। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से आयोजित वॉकाथॉन में विद्यार्थियों, युवाओं, विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों, विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों और प्रकृति प्रेमियों ने भाग लिया। आयोजन के माध्यम से लोगों को वन्यजीव संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
वन भवन से हुई अभियान की शुरुआत
रांची स्थित वन भवन में गुब्बारे उड़ाकर और हस्ताक्षर अभियान के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फोर्स संजीव कुमार ने कहा कि स्वस्थ पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में वन्यजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनकी सुरक्षा के साथ प्राकृतिक आवासों को बचाना भी जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को समृद्ध प्राकृतिक विरासत मिल सके।
उन्होंने संरक्षण अभियान में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी पर जोर दिया। कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों और युवाओं को प्रकृति से जोड़ते हैं तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करते हैं। उन्होंने लोगों से दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपनाने और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने की अपील की।
सामूहिक प्रयास से सुरक्षित होगी प्राकृतिक विरासत
पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ सह मुख्य वन्यजीव वार्डन रवि रंजन ने झारखंड की वन संपदा और जैव-विविधता को राज्य की अनमोल धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि जंगल, वन्यजीव और प्रकृति एक-दूसरे पर निर्भर हैं। इनके संरक्षण के लिए जागरूकता के साथ निरंतर सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा का दायित्व केवल सरकार या वन विभाग तक सीमित नहीं है। हर नागरिक को इसमें योगदान देना होगा। वॉकाथॉन का उद्देश्य लोगों में इसी साझा जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है।
अरगोड़ा, बिरसा चौक और हिनू तक पहुंचा संदेश
अधिकारियों के संबोधन के बाद प्रतिभागियों ने वन भवन से पदयात्रा शुरू की। अरगोड़ा, बिरसा चौक और हिनू होते हुए वॉकाथॉन निर्धारित मार्ग से वापस वन भवन पहुंचा। पदयात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने वन्यजीवों की सुरक्षा, जैव-विविधता के संरक्षण और प्रकृति को बचाने का संदेश दिया। युवाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी के साथ लोगों से संरक्षण के प्रयासों को अपने रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया।




