
रांची: झारखंड की महिला किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार एक नई योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित ‘महिला किसान खुशहाली योजना’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें खेती से जुड़ी कई दूसरी गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी है। योजना का मुख्य आधार इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम यानी समेकित कृषि प्रणाली होगा। प्रस्ताव को जल्द राज्य मंत्रिपरिषद के समक्ष रखे जाने की उम्मीद है।
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के अनुसार सरकार का उद्देश्य महिला किसानों को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रखना है। उन्हें खेती के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। इससे एक महिला किसान को एक ही खेत या कृषि इकाई से आमदनी के कई स्रोत मिल सकेंगे।
क्या है ‘महिला किसान खुशहाली योजना’?
प्रस्तावित योजना का उद्देश्य झारखंड की महिला किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। अभी ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं खेती और उससे जुड़े कामों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। खेत तैयार करने से लेकर रोपनी, कटाई, पशुओं की देखभाल और सब्जी उत्पादन तक में महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
नई योजना में इसी श्रम और भागीदारी को व्यवस्थित तरीके से आय से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। सरकार चाहती है कि महिला किसान केवल फसल की पैदावार पर निर्भर न रहें, बल्कि उनके पास पूरे वर्ष कमाई के अलग-अलग साधन उपलब्ध हों।
एक एकड़ जमीन पर विकसित हो सकता है मॉडल
योजना के शुरुआती स्वरूप में व्यक्तिगत महिला किसान के लिए एक एकड़ भूमि पर इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव है। स्थानीय परिस्थितियों, जमीन, पानी की उपलब्धता और क्षेत्र की जरूरतों के आधार पर अलग-अलग कृषि मॉडल तैयार किए जा सकते हैं।
इन मॉडलों में खेती के साथ बकरी पालन, सूकर पालन, बत्तख पालन, डेयरी, मछली पालन और बागवानी जैसी गतिविधियों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
इसका फायदा यह होगा कि यदि किसी मौसम में एक फसल से अपेक्षित आमदनी नहीं होती है, तो महिला किसान के पास आय के दूसरे साधन मौजूद रहेंगे। उदाहरण के तौर पर खेत में धान या सब्जी की खेती के साथ तालाब में मछली पालन, पशुपालन या बागवानी से अतिरिक्त कमाई की जा सकती है।
एक खेत से कमाई के कई रास्ते
समेकित खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें खेती और उससे जुड़े विभिन्न व्यवसायों को एक-दूसरे से जोड़ा जाता है। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
सरकार का लक्ष्य ऐसा मॉडल तैयार करना है जिसमें एक ही कृषि इकाई के भीतर खेती, पशुपालन, मछली पालन और बागवानी जैसी गतिविधियां संचालित हो सकें। इससे महिला किसानों के लिए साल भर रोजगार और आय के अवसर तैयार करने में मदद मिल सकती है।
कृषि विभाग वैज्ञानिक और आधुनिक कृषि पद्धतियों के आधार पर अलग-अलग मॉडल तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। अलग-अलग जिलों की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों को देखते हुए मॉडल में बदलाव भी किया जा सकता है।
ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर फोकस
झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य के कई इलाकों में महिलाएं सीधे तौर पर कृषि कार्य से जुड़ी हुई हैं। इसके बावजूद खेती से होने वाली आय और कृषि संबंधी संसाधनों पर उनका नियंत्रण अपेक्षाकृत सीमित रहा है।
‘महिला किसान खुशहाली योजना’ के जरिए सरकार महिला किसानों को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। योजना सफल होती है तो महिलाओं को अपने गांव में ही रोजगार और आमदनी के नए अवसर मिल सकते हैं।
इसका प्रभाव केवल एक महिला किसान की आय तक सीमित नहीं रहेगा। आमदनी बढ़ने से परिवार की आर्थिक स्थिति, बच्चों की शिक्षा, पोषण और ग्रामीण बाजार पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
सीमित लाभार्थी योगदान पर भी विचार
योजना तैयार करते समय लाभार्थियों की भागीदारी को भी ध्यान में रखा जा रहा है। प्रारंभिक स्तर पर सीमित लाभार्थी योगदान की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है, ताकि योजना में महिला किसानों की भागीदारी और स्वामित्व की भावना बनी रहे।
इसके साथ ही परियोजना के सफल क्रियान्वयन के बाद लाभार्थी द्वारा दिए गए योगदान को वापस करने के प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है। हालांकि योजना की अंतिम शर्तें और वित्तीय स्वरूप मंत्रिपरिषद की मंजूरी और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
हेमंत सरकार का ग्रामीण आजीविका पर जोर
यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ग्रामीण और किसान आधारित आजीविका को मजबूत करने की नीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार राज्य में समेकित खेती का दायरा बढ़ाकर कृषि को केवल मौसमी गतिविधि के बजाय साल भर आमदनी देने वाले व्यवसाय के रूप में विकसित करना चाहती है।
विशेष रूप से महिला किसानों को केंद्र में रखकर तैयार की जा रही यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को और मजबूत कर सकती है।
फिलहाल ‘महिला किसान खुशहाली योजना’ प्रस्तावित चरण में है। तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को अंतिम रूप दिए जाने के बाद इसे राज्य मंत्रिपरिषद के सामने रखा जाना है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही योजना के लाभार्थियों की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, सरकारी सहायता, लाभार्थी योगदान और क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत नियम सामने आएंगे।
यदि योजना अपने प्रस्तावित स्वरूप में जमीन पर उतरती है तो झारखंड की महिला किसानों के लिए यह केवल एक कृषि योजना नहीं, बल्कि एक खेत से आय के कई रास्ते खोलने वाली पहल बन सकती है।
एक लाइन में कहें तो—खेती के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी; लक्ष्य है महिला किसान की साल भर आमदनी और गांव में ही आर्थिक आत्मनिर्भरता।





