रांची में बारिश का असर: कांके डैम का फाटक तीसरी बार खुला, निचले इलाकों में अलर्ट

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जलस्तर बढ़ने पर चार इंच खोला गया फाटक, जरूरत पड़ी तो दूसरा गेट भी खोला जाएगा; इस मानसून सामान्य से 10% ज्यादा बारिश

रांची में लगातार हो रही बारिश के बीच कांके डैम का जलस्तर एक बार फिर बढ़ गया है।
जलस्तर निर्धारित सीमा से ऊपर पहुंचने के बाद डैम का एक फाटक खोलकर पानी की निकासी शुरू कर दी गई है। इस मानसून सीजन में यह तीसरी बार है, जब कांके डैम का गेट खोला गया है।

जानकारी के मुताबिक, 31 अगस्त की रात करीब 11 बजे डैम का एक फाटक चार इंच तक खोला गया, जिसके बाद पानी की निकासी शुरू हुई। डैम में लगातार पानी की आवक बनी हुई है। डैम के केमिस्ट विकास के अनुसार, अगर बारिश का सिलसिला जारी रहता है और जलस्तर में और बढ़ोतरी होती है, तो स्थिति को देखते हुए दूसरा फाटक भी खोला जा सकता है।

इधर, डैम से पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से पानी के तेज बहाव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखने और अनावश्यक रूप से ऐसे स्थानों पर नहीं जाने की अपील की गई है।

इससे पहले भी कांके डैम का फाटक खोला जा चुका है। 14 अगस्त को डैम का एक गेट छह इंच तक खोला गया था। लगातार बारिश के कारण डैम में पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। अब अगर राजधानी में हुई बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस मानसून रांची में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

1 जून से 1 सितंबर तक रांची में 907.5 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षापात करीब 823.9 मिलीमीटर माना जाता है। यानी अब तक बारिश सामान्य से लगभग 10 प्रतिशत अधिक हुई है।

अच्छी बारिश का सीधा फायदा कांके डैम के जल भंडारण पर भी पड़ा है। राजधानी में कांके डैम को पेयजल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। डैम में पर्याप्त पानी जमा होने से आने वाली गर्मी में पेयजल संकट और पानी की राशनिंग का खतरा कम होने की उम्मीद है।

हालांकि, ज्यादा बारिश के बीच डैम के कैचमेंट एरिया में बढ़ता अतिक्रमण अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण से बारिश के पानी के प्राकृतिक बहाव और डैम तक पानी पहुंचने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल, लगातार बारिश को देखते हुए डैम के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। अगर पानी का स्तर और बढ़ता है, तो दूसरा फाटक भी खोला जा सकता है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

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