रांची में CM उत्कृष्ट विद्यालयों से 32 शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति खत्म, जरूरत के हिसाब से दूसरे स्कूलों में भेजे गए

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एक सप्ताह में 50 से ज्यादा शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त, ग्रामीण और शहरी स्कूलों में मिली नई जिम्मेदारी; भूगोल के शिक्षक को ऐसे स्कूल में भेजने पर उठे सवाल, जहां विषय के विद्यार्थी ही नहीं

रांची जिले के अलग-अलग मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों में तैनात 32 शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी गई है। इसके बाद शिक्षकों को उनकी जरूरत और स्कूलों की स्थिति के आधार पर दूसरे विद्यालयों में भेजा गया है। इनमें कुछ शिक्षक अपने मूल विद्यालय लौटाए गए हैं, जबकि कुछ को दूसरे स्कूलों में नई जिम्मेदारी दी गई है।

इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की ओर से आदेश जारी किया गया है।

आंकड़ों की बात करें तो सबसे ज्यादा 14 शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव जिला मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय से खत्म की गई है। वहीं, ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय जगन्नाथपुर धुर्वा से 2, कांके से 3 और मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय बालिका बरियातू से 13 शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त हुई है।

आदेश के मुताबिक, इन शिक्षकों को अब आवश्यकता वाले विद्यालयों में प्रतिनियुक्त किया गया है। इसके लिए संबंधित शिक्षकों को उनके वर्तमान विद्यालयों से विरमित भी कर दिया गया है, ताकि वे नई जगह पर योगदान दे सकें।

अब बात करते हैं कि इन शिक्षकों को कहां भेजा गया है।

कुछ शिक्षकों की तैनाती कांके, मांडर, बुढ़मू, बुंडू, अनगड़ा और ओरमांझी जैसे ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में की गई है। वहीं, कुछ शिक्षकों को रांची शहरी क्षेत्र के ही उन विद्यालयों में भेजा गया है, जहां शिक्षकों की कमी बताई गई है।

लेकिन इसी बीच एक तैनाती को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

पिछले दिनों प्लस टू विद्यालयों में भी शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त की गई थी। इनमें कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नामकुम के भूगोल शिक्षक नीरज कुमार भी शामिल हैं। उन्हें उनके मूल विद्यालय प्रोजेक्ट प्लस टू हाई स्कूल खूंटी वापस भेजा गया है।

अब सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जानकारी के मुताबिक, इस स्कूल में प्लस टू स्तर पर भूगोल विषय के विद्यार्थी ही नहीं हैं। ऐसे में अगर वहां इस विषय के छात्र नहीं हैं, तो शिक्षक की तैनाती किस आधार पर की गई, इसे लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

दरअसल, जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की ओर से करीब एक सप्ताह के भीतर प्लस टू और हाईस्कूल को मिलाकर 50 से ज्यादा शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त की जा चुकी है। ये शिक्षक राजधानी के अलग-अलग मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों में प्रतिनियुक्त थे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि—

अगर इन स्कूलों में इन शिक्षकों की जरूरत नहीं थी, तो आखिर उन्हें पहले प्रतिनियुक्त किस आधार पर किया गया था?

क्या प्रतिनियुक्ति से पहले स्कूलों में शिक्षकों की वास्तविक जरूरत का आकलन नहीं किया गया था? और अगर जरूरत के आधार पर ही अब नई तैनाती की जा रही है, तो पहले की नियुक्तियों का आधार क्या था? शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति और फिर उसे खत्म करने की इस पूरी प्रक्रिया ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और प्लानिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल, शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में भेज दिया गया है। लेकिन प्रतिनियुक्ति के फैसले और बाद में उसे खत्म करने के पीछे की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब क्या मिलता है, यह देखना अहम होगा।

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