श्रमिक संगठनों ने वेतन भुगतान, आधुनिकीकरण और आर्थिक पैकेज की मांग रखी; समिति ने HEC की जमीन, मशीनरी और देनदारियों की भी ली जानकारी

रांची: हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन यानी HEC के पुनरुद्धार को लेकर उम्मीदें एक बार फिर बढ़ी हैं। गुरुवार को उद्योग संबंधी राज्यसभा की संसदीय समिति ने HEC मुख्यालय का दौरा किया और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग बातचीत की। इस दौरान कर्मचारियों की समस्याओं, कंपनी की आर्थिक स्थिति और प्लांटों के आधुनिकीकरण को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
समिति ने श्रमिक नेताओं को भरोसा दिया कि HEC की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार को सकारात्मक रिपोर्ट दी जाएगी। श्रमिक संगठनों ने भी कंपनी को संकट से निकालने के लिए आर्थिक पैकेज, मशीनों के आधुनिकीकरण और लंबित वेतन के भुगतान जैसी मांगें समिति के सामने रखीं।
श्रमिक नेताओं ने रखीं HEC को बचाने की मांगें
HEC मुख्यालय में हुई बैठक में हटिया मजदूर यूनियन के भवन सिंह, हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन के लीलाधर सिंह और हटिया मजदूर लोक मंच के रामकुमार नायक ने समिति के सामने कर्मचारियों और संस्थान से जुड़ी समस्याएं रखीं। भवन सिंह ने HEC के पुनरुद्धार के लिए विशेष पैकेज देने, पुरानी मशीनों के आधुनिकीकरण, कर्मचारियों के बकाया वेतन के भुगतान और बैंक गारंटी उपलब्ध कराने की मांग की। इसके साथ ही करीब 500 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने की भी मांग रखी गई। इन मांगों पर संसदीय समिति के अध्यक्ष तिरुचि शिवा ने आश्वासन दिया कि HEC की स्थिति और श्रमिकों की मांगों को ध्यान में रखते हुए केंद्र को सकारात्मक रिपोर्ट दी जाएगी।
CMD और निदेशकों से भी समिति ने ली जानकारी
संसदीय समिति के सदस्यों ने HEC के CMD और निदेशकों के साथ भी बैठक की। इस दौरान कंपनी की वर्तमान स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी ली गई। समिति ने HEC की जमीन और संपत्तियों की स्थिति, उनके मौजूदा उपयोग, खाली पड़ी जमीन, अतिक्रमण और स्वामित्व से जुड़े मामलों की जानकारी हासिल की। इसके अलावा कंपनी के प्लांट, मशीनरी और उत्पादन सुविधाओं की मौजूदा हालत पर भी चर्चा हुई। मशीनों की परिचालन स्थिति, उत्पादन क्षमता के इस्तेमाल और भविष्य में आधुनिकीकरण की संभावनाओं के साथ-साथ HEC की देनदारियों पर भी समिति ने विस्तृत जानकारी ली।
आठ श्रमिक संगठनों ने उठाए कर्मचारियों के मुद्दे
HEC मुख्यालय पहुंचे आठ श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दे सामने रखे। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री रमाशंकर प्रसाद ने कर्मचारियों को नियमित रूप से हर महीने वेतन देने की मांग की। उन्होंने HEC परिसर में संचालित स्कूलों में कर्मचारियों के बच्चों के लिए रियायती दर पर नामांकन की व्यवस्था करने का मुद्दा भी उठाया। इस पर HEC के CMD केएस मूर्ति ने संबंधित निदेशकों को स्कूल प्रबंधन से बातचीत कर जल्द आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। साथ ही HEC कर्मियों के लिए पारस अस्पताल में OPD सुविधा बहाल करने की बात भी सामने आई।
34 महीने के बकाया वेतन का मुद्दा भी उठा
HEC ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रेम शंकर पासवान ने कंपनी के लिए आर्थिक पैकेज जल्द मंजूर कराने और कर्मचारियों के करीब 34 महीने के बकाया वेतन का भुगतान कराने की मांग रखी। वहीं हटिया कामगार यूनियन के एमपी रामचंद्रन ने खराब और पुरानी मशीनों का मुद्दा उठाते हुए प्लांटों के व्यापक आधुनिकीकरण की जरूरत बताई। श्रमिक नेताओं का कहना था कि आधुनिक मशीनरी के बिना HEC की उत्पादन क्षमता को पूरी तरह इस्तेमाल करना मुश्किल होगा।
समिति के सदस्यों ने राज्यपाल से भी की मुलाकात
HEC दौरे के दौरान संसदीय समिति के सदस्यों ने राजभवन पहुंचकर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से शिष्टाचार मुलाकात भी की। समिति के अध्यक्ष तिरुचि शिवा, HEC पुनरुद्धार संबंधी उपसमिति के संयोजक कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी के अलावा सांसद सुलता देव, डॉ. मल्लू रवि, हंसमुखभाई सोमाभाई पटेल और चंदन चौहान ने राज्यपाल को HEC की मौजूदा स्थिति और दौरे के दौरान सामने आए मुद्दों की जानकारी दी।
सांसद महुआ माजी ने भी उठाया पुनरुद्धार का मुद्दा
झामुमो की राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने भी समिति के सदस्यों के साथ HEC के प्लांटों का दौरा किया। उन्होंने कहा कि समिति का रुख सकारात्मक दिखाई दिया है। उन्होंने कहा कि HEC झारखंड के लिए एक महत्वपूर्ण औद्योगिक संस्थान है, लेकिन लंबे समय से कर्मचारी आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से संसदीय समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए HEC के लिए आर्थिक पैकेज और प्लांटों के आधुनिकीकरण की मांग की।
कांग्रेस ने मांगा 10 हजार करोड़ का पैकेज
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने संसदीय समिति के सामने HEC के पुनरुद्धार के लिए तत्काल 10 हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग रखी। उन्होंने केंद्र सरकार पर HEC की जमीन और परिसंपत्तियों को बेचने की योजना बनाने का आरोप लगाया। प्रदेश कांग्रेस महासचिव विनय सिन्हा दीपू ने भी HEC को निजी हाथों में सौंपे जाने की आशंका जताते हुए केंद्र से संस्थान के पुनरुद्धार की दिशा में तत्काल कदम उठाने की मांग की।
अब केंद्र की रिपोर्ट पर टिकी नजर
HEC कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों की निगाह अब संसदीय समिति की रिपोर्ट पर है। लंबे समय से वेतन बकाया, मशीनों की खराब स्थिति और आर्थिक संकट से जूझ रहे HEC के लिए समिति की अनुशंसा अहम मानी जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि समिति की सकारात्मक रिपोर्ट के

