नाला प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय डुमरिया (ख) का हाल बेहाल; 1991-92 में बने भवन की नहीं हुई मरम्मत, नया भवन वर्षों से अधूरा और चहारदीवारी भी नहीं

Nala School News: जामताड़ा जिले के नाला प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय डुमरिया (ख) की बदहाल स्थिति ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। वर्षों पुराने और जर्जर हो चुके विद्यालय भवन में कक्षा एक से आठ तक के 61 छात्र-छात्राएं पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
विद्यालय की छत से प्लास्टर और कंक्रीट के टुकड़े टूटकर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। बरामदे की छत भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ऐसे में स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों और यहां कार्यरत शिक्षकों के लिए हर दिन जोखिम बना हुआ है।
बरामदे की छत का बड़ा हिस्सा गिरा, बाल-बाल बचे बच्चे
विद्यार्थियों के अनुसार, कुछ दिन पहले विद्यालय के बरामदे की छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया था। राहत की बात रही कि उस समय कोई बच्चा इसकी चपेट में नहीं आया। इस घटना के बाद विद्यालय भवन की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। बच्चों को डर के माहौल में कक्षाओं में बैठना पड़ रहा है क्योंकि भवन के अलग-अलग हिस्सों से प्लास्टर गिरने का खतरा बना रहता है।
61 बच्चों के लिए सिर्फ दो कमरे
विद्यालय में कक्षा 1 से कक्षा 8 तक कुल 61 विद्यार्थी नामांकित हैं, लेकिन उनके लिए पूरे स्कूल में केवल दो कक्ष और एक कार्यालय उपलब्ध है। इन दोनों कक्षों के साथ कार्यालय की हालत भी खराब बताई जा रही है। सीमित कमरों के कारण पहले ही पढ़ाई की व्यवस्था चुनौतीपूर्ण है और अब भवन की जर्जर स्थिति ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।
1991-92 में बना था स्कूल भवन
जानकारी के मुताबिक, वर्तमान विद्यालय भवन का निर्माण वर्ष 1991-92 में किया गया था। इसके बाद भवन का व्यापक जीर्णोद्धार नहीं कराया गया और आवश्यक मरम्मत भी नहीं होने की बात सामने आई है। तीन दशक से अधिक पुराने भवन में समय के साथ नुकसान बढ़ता गया। अब हालत यह है कि छत और बरामदे के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
नया भवन बना, लेकिन वर्षों से अधूरा
पुराने भवन की हालत खराब होने के बावजूद बच्चों को सुरक्षित जगह नहीं मिल पा रही है। विद्यालय परिसर में नए भवन का निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन यह काम वर्षों से अधूरा पड़ा है। नया भवन पूरा नहीं होने के कारण बच्चों के सामने पुराने जर्जर कमरों में पढ़ाई जारी रखने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।
स्कूल में सिर्फ दो शिक्षक
बुनियादी ढांचे के साथ शिक्षकों की संख्या भी बेहद सीमित है। वर्तमान में विद्यालय में केवल दो शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि यहां पहली से आठवीं कक्षा तक 61 बच्चे नामांकित हैं। ऐसे में दो शिक्षकों के सामने आठ कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई संभालने की बड़ी चुनौती है।
चहारदीवारी नहीं, पास में तालाब से भी खतरा
स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक और गंभीर समस्या सामने आई है। विद्यालय में चहारदीवारी नहीं है। इसके अलावा परिसर के नजदीक एक तालाब भी मौजूद है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों को आशंका है कि चहारदीवारी नहीं होने के कारण बच्चे तालाब की ओर जा सकते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। एक तरफ जर्जर भवन और गिरता प्लास्टर, दूसरी तरफ चहारदीवारी का अभाव और पास में तालाब होने से बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई स्तर पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रधानाध्यापक बोले, विभाग को कई बार दी जानकारी
विद्यालय के प्रधानाध्यापक संजय कुमार के मुताबिक, स्कूल भवन की खराब स्थिति के संबंध में विभाग को कई बार जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं होने की बात उन्होंने कही है।
अभिभावकों ने की नए भवन की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मांग है कि पुराने भवन की तकनीकी जांच कराकर जरूरी मरम्मत कराई जाए या फिर अधूरे पड़े नए विद्यालय भवन का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए। साथ ही स्कूल परिसर में चहारदीवारी की व्यवस्था करने की भी मांग उठ रही है। अब सबसे बड़ा सवाल बच्चों की सुरक्षा का है। बरामदे की छत का हिस्सा गिरने की घटना चेतावनी बन चुकी है। ऐसे में किसी बड़े हादसे से पहले विद्यालय भवन को सुरक्षित बनाना बेहद जरूरी है।

