₹5.5 करोड़ की 61 जलमीनारें बंद: 40 हजार लोगों पर जलसंकट, मेंटेनेंस को लेकर विभाग-पंचायत आमने-सामने

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फतेहपुर प्रखंड के SC-ST बहुल गांवों में मुख्यमंत्री जल नल योजना का हाल बेहाल; टंकियां फटने से पानी का रिसाव, ₹2-5 हजार की मामूली मरम्मत के अभाव में करोड़ों की योजना ठप

Fatehpur Water Crisis: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बहुल गांवों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई जलमीनारें अब खुद बदहाली की तस्वीर पेश कर रही हैं। फतेहपुर प्रखंड में वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान मुख्यमंत्री जल नल योजना के तहत करीब ₹5.5 करोड़ की लागत से स्थापित 61 जलमीनारें बंद पड़ी हैं।

रखरखाव नहीं होने के कारण कई जलमीनारों की पानी की टंकियां समय से पहले क्षतिग्रस्त हो गई हैं। टंकियों से पानी का रिसाव हो रहा है और नलों तक पानी नहीं पहुंच रहा। इसका सीधा असर हजारों ग्रामीणों पर पड़ रहा है।

करीब 40 हजार लोगों को हो रही परेशानी

जानकारी के मुताबिक, इन जलमीनारों के ठप होने के कारण प्रखंड के करीब 40 हजार लोग पिछले एक से दो वर्षों से पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। योजना के तहत प्रत्येक जलमीनार की क्षमता करीब 5,000 लीटर रखी गई थी और एक जलमीनार स्थापित करने पर लगभग ₹9 लाख खर्च किए गए थे।

प्रखंड की चार पंचायतों में कुल 61 जलमीनारें लगाई गई थीं। इनमें जमजोरी पंचायत में 6, धंसनिया में 18, अगैया सरगुंडी में 26 और चापुड़िया पंचायत में 11 जलमीनारें शामिल हैं। अब इनमें से कई जगह ग्रामीणों को नल से पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में लोगों को एक बार फिर पुराने चापाकलों और पारंपरिक जलस्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

मेंटेनेंस को लेकर विभाग और पंचायत के अलग-अलग तर्क

जलमीनारों की खराब स्थिति के बीच सबसे बड़ा सवाल इनके रखरखाव की जिम्मेदारी को लेकर खड़ा हो गया है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कनीय अभियंता विकास दास के मुताबिक, विभाग ने पांच वर्षों तक जलमीनारों का रखरखाव कराया। अब विभाग को इसके मेंटेनेंस के लिए अलग से कोई मद उपलब्ध नहीं है।

उनके अनुसार, विभागीय बैठकों में यह निर्णय लिया गया है कि जलमीनारों के रखरखाव पर होने वाला खर्च पंचायतों को उपलब्ध कराए गए टाइड फंड से किया जाएगा। ऐसे में अब मरम्मत और संचालन की जिम्मेदारी संबंधित पंचायतों की है।

टाइड फंड से मरम्मत के निर्देश, फिर भी नहीं हुई पहल

ग्रामीण विकास विभाग के पंचायती राज विभाग की ओर से पंचायतों को पत्र जारी कर टाइड फंड का इस्तेमाल जलापूर्ति व्यवस्था के रखरखाव में करने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है। इसके तहत जलापूर्ति और जल जीवन मिशन से संबंधित नल कनेक्शन, मरम्मत और रखरखाव पर राशि खर्च की जा सकती है।

इसके बावजूद अधिकांश संबंधित पंचायतों में बंद जलमीनारों को चालू कराने की दिशा में ठोस पहल नहीं होने की बात कही जा रही है। परिणाम यह है कि लाखों रुपये की जलमीनारें ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराने के बजाय बेकार पड़ी हैं।

₹2 से ₹5 हजार की मरम्मत से बच सकती थी योजना?

जानकारों के मुताबिक, कई जलमीनारों में समय रहते छोटी-मोटी खराबियों को ठीक कर दिया जाता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। दावा है कि कई मामलों में ₹2,000 से ₹5,000 तक की मामूली मरम्मत पर्याप्त हो सकती थी। समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण छोटी खराबियां बढ़ती चली गईं और करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई सरकारी परिसंपत्तियां धीरे-धीरे अनुपयोगी होती गईं।

मुखिया बोले, BDO से परामर्श के बाद लेंगे फैसला

दूसरी ओर, अगैया सरगुंडी पंचायत के मुखिया उमेश्वर मुर्मू का कहना है कि जलमीनारों का निर्माण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से कराया गया था। इसलिए पंचायत अपने स्तर पर इसकी मरम्मत किस प्रक्रिया के तहत कराए, इसे लेकर स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उनके पास स्पष्ट आदेश नहीं है। पहले प्रखंड विकास पदाधिकारी यानी BDO से परामर्श लिया जाएगा और उसके बाद मरम्मत को लेकर आगे का निर्णय किया जाएगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की मरम्मत की मांग

विभाग और पंचायत के बीच जिम्मेदारी को लेकर बनी स्थिति का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। जिन परिवारों के लिए घर के पास स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था तैयार की गई थी, वे अब फिर पुराने जलस्रोतों का सहारा लेने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी 61 बंद जलमीनारों का सर्वे कराया जाए, खराबी की वास्तविक स्थिति का आकलन हो और जल्द से जल्द मरम्मत कराकर जलापूर्ति बहाल की जाए।

अब बड़ा सवाल यही है कि करीब ₹5.5 करोड़ की लागत से तैयार इन जलमीनारों की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा और लगभग 40 हजार ग्रामीणों के नलों में पानी कब लौटेगा?

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