रांची: भारत और ब्रिटेन के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (FTA) और सामाजिक सुरक्षा समझौता बुधवार से लागू हो गया है। इस समझौते के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

समझौते के तहत भारत में स्कॉच व्हिस्की, जिन और कुछ लग्जरी ब्रिटिश कारों पर आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। इससे आने वाले वर्षों में इन उत्पादों की कीमतों में कमी आने की संभावना है।
वहीं दूसरी ओर, भारतीय निर्यातकों के लिए ब्रिटेन का बाजार और अधिक खुल जाएगा। वस्त्र, जूते-चप्पल, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, रसायन और दवा उद्योग सहित कई भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त या रियायती पहुंच का लाभ मिलेगा।
केंद्र सरकार का कहना है कि इस समझौते से व्यापार, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे किसानों, एमएसएमई, उद्योगों और युवाओं के लिए नए अवसरों का द्वार बताया है। समझौते के तहत भारत हर वर्ष 11 लाख टन से अधिक इस्पात ब्रिटेन को शुल्क-मुक्त निर्यात कर सकेगा। इसके लिए भारत का देश-विशिष्ट कोटा बढ़ाकर 1,68,029 टन किया गया है, जिससे इस्पात उद्योग को भी बड़ी राहत मिलेगी।
व्यापार सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, समझौते के पहले ही दिन 14 करोड़ डॉलर से अधिक मूल्य के भारतीय सामान ब्रिटेन भेजे गए। उद्योग जगत का मानना है कि इससे कपड़ा, जेम्स एंड ज्वेलरी, खेल सामग्री, हस्तशिल्प, आईटी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि इस व्यापार समझौते के जरिए अगले पांच वर्षों में भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना किया जाए, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

