वॉशिंगटन: अमेरिकी सेना में ईरान युद्ध के दरम्यान बड़ा बदलाव हुआ है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने आर्मी चीफ जनरल रैंडी ए जॉर्ज (General Randy A. George) को तुरंत रिटायर होने के लिए कहा है । यह US Army Chief forced retirement अमेरिकी सैन्य इतिहास में एक दुर्लभ घटना है, खासकर जब देश ईरान के साथ सक्रिय संघर्ष में लगा हो।
अचानक लिए गए इस फैसले के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। पेंटागन (Pentagon) ने गुरुवार (2 अप्रैल 2026) को इस कदम की पुष्टि की । आइए जानते हैं इस US Army Chief forced retirement से जुड़ी हर अहम बात, इसके पीछे की वजहें और इसके संभावित परिणाम।
US Army Chief forced retirement: पेंटागन ने क्या कहा?
US Army Chief forced retirement पर पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पर्नेल (Sean Parnell) ने आधिकारिक बयान जारी किया।

तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्ति
पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पर्नेल ने कहा कि जॉर्ज ‘तत्काल प्रभाव से सेना के 41वें चीफ ऑफ स्टाफ के पद से सेवानिवृत्त होंगे’ । उन्होंने कहा कि विभाग उनके ‘देश के प्रति दशकों की सेवा’ के लिए आभारी है । हालांकि, उनके जबरन रिटायरमेंट के कारणों पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
नए कार्यवाहक प्रमुख की नियुक्ति
रैंडी के जबरन रिटायरमेंट के बाद, मौजूदा वाइस चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर ला-नेव (Christopher La-Neve) को कार्यवाहक आर्मी चीफ (Acting Army Chief) नियुक्त किया गया है । 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के पूर्व कमांडर ला-नेव पहले हेगसेथ के सैन्य सहयोगी भी थे ।
US Army Chief forced retirement: क्यों हटाया गया जॉर्ज?
US Army Chief forced retirement के पीछे ट्रंप प्रशासन की व्यापक रणनीति मानी जा रही है।
DEI नीतियों पर असहमति
यह अचानक नेतृत्व परिवर्तन, हेगसेथ द्वारा अमेरिकी सैन्य ढांचे में किए जा रहे व्यापक बदलाव का हिस्सा है । वह पहले ही एक दर्जन से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को हटा चुके हैं । हेगसेथ पहले भी अमेरिकी सेना से ‘डाइवर्सिटी, इक्विटी और इंक्लूजन’ (DEI) नीतियों को हटाने की बात कर चुके हैं । माना जा रहा है कि जॉर्ज को इन नीतियों का समर्थक माना जाता था, जिसके चलते उन्हें हटाया गया।
पिछले प्रशासन से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई
माना जा रहा है ट्रंप प्रशासन उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, जिन्हें पिछले प्रशासन की नीतियों से प्रभावित माना जाता है । यूएस मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हेगसेथ चार सैन्य अधिकारियों (दो महिलाओं और दो अश्वेत पुरुषों) को वन-स्टार जनरल बनाने की प्रक्रिया को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
US Army Chief forced retirement: क्या है जॉर्ज का सैन्य करियर?

US Army Chief forced retirement से पहले जनरल रैंडी जॉर्ज का सैन्य करियर बेहद शानदार रहा है।
गल्फ वॉर से लेकर अफगानिस्तान तक
जनरल रैंडी जॉर्ज एक इन्फैंट्री अधिकारी हैं और वेस्ट प्वाइंट मिलिट्री अकादमी (West Point Military Academy) के स्नातक हैं । उन्होंने पहले खाड़ी युद्ध (Gulf War) के साथ-साथ इराक और अफगानिस्तान में भी सेवा दी है । उन्हें 2023 में सेना के शीर्ष पद पर नियुक्त किया गया था ।
कार्यकाल समाप्ति से एक साल पहले हटाए गए
आमतौर पर यूएस आर्मी चीफ का कार्यकाल चार साल का होता है, ऐसे में रैंडी 2027 में रिटायर होते, यानी उनके पास एक साल का समय और बचा था । उन्हें पद से हटाए जाने से कुछ दिन पहले ही, वेस्ट प्वाइंट में कैडेट्स के साथ बातचीत कर रहे थे और उन्हें नेतृत्व के लिए अपने अनुभव के आधार पर मार्गदर्शन दे रहे थे।
US Army Chief forced retirement: पिछली बर्खास्तगी की लहर
US Army Chief forced retirement इससे पहले भी हुई बर्खास्तगी की लहर का हिस्सा है।
चार्ल्स ब्राउन और लीसा फ्रैंचेटी भी हटाए गए
रैंडी पिछले साल फरवरी में हुई शुरुआती बर्खास्तगी की लहर से बच गए थे, जिनमें जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल चार्ल्स क्यू ब्राउन जूनियर (General Charles Q. Brown Jr.) और नौसेना प्रमुख एडमिरल लीसा फ्रैंचेटी (Admiral Lisa Franchetti) और एयर फोर्स के नंबर-2 अधिकारी जनरल जेम्स स्लिफ को हटाया गया था ।
एक दर्जन से अधिक अधिकारी हटाए जा चुके
इसके बाद से एक दर्जन से अधिक अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी या तो समय से पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं या उन्हें उनके पदों से हटा दिया गया है । इनमें जॉर्ज के डिप्टी, आर्मी के वाइस चीफ ऑफ स्टाफ जनरल जेम्स मिंगस भी शामिल थे, जिन्हें इस पद पर दो साल से कम समय हुआ था।
US Army Chief forced retirement: ईरान युद्ध के बीच क्यों बदला जा रहा सैन्य नेतृत्व?
US Army Chief forced retirement ऐसे समय हो रहा है जब ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।
ट्रंप का युद्ध समाप्ति का दावा
ईरान युद्ध पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध का कालक्रम आने वाले 2-3 हफ्ते तक का निर्धारित कर दिया है । उनके अनुसार, अमेरिका जल्द से जल्द इस युद्ध से बाहर होगा। हालांकि, युद्ध के बीच इस तरह सैन्य बदलाव करना थोड़ा आश्चर्यचकित करता है।
मनोबल पर असर की आशंका
शीर्ष नेतृत्व को बदलना अमेरिका के लिए घातक हो सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इससे ग्राउंड पर सैनिकों का मनोबल (Morale) टूट सकता है । हालांकि, ट्रंप ने अपने भाषण में यह भी कहा था कि वह आने वाले दिनों में ईरान के ऊपर और बड़ा हमला कर सकते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन अपनी नीतियों के मुताबिक सैन्य नेतृत्व को पद पर बैठाना चाहता है, जो उनके लक्ष्यों को प्राप्त करा सके।
US Army Chief forced retirement: निष्कर्ष
US Army Chief forced retirement ने अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान में हलचल मचा दी है। जनरल रैंडी जॉर्ज को उनके कार्यकाल समाप्ति से एक साल पहले ही हटा दिया गया है, जो ट्रंप प्रशासन की सैन्य नेतृत्व में DEI नीतियों के खिलाफ चल रही सफाई का हिस्सा है । यह फैसला ईरान युद्ध के बीच में लिया गया है, जिससे सेना के मनोबल पर असर पड़ने की आशंका है । अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नए कार्यवाहक प्रमुख जनरल क्रिस्टोफर ला-नेव इस भूमिका में कैसा प्रदर्शन करते हैं और क्या ट्रंप प्रशासन आगे और बर्खास्तगी करता है।
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