ईरान ने अमेरिकी हवाई हमलों में 38 लोगों के मारे जाने का दावा किया, जवाबी कार्रवाई में कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले और क्षेत्रीय तनाव तेज।

तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। हाल ही में हुए युद्धविराम (सीजफायर) के टूटने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेज हो गया है। ईरान ने दावा किया है कि अमेरिकी हवाई हमलों में 38 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं ईरान समर्थित समूहों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। इससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
इसी बीच ओमान की खाड़ी के पास एक ब्रिटिश टैंकर पर भी हमले की खबर सामने आई है। हालांकि चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं, लेकिन इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। तनाव का असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई और एक दिन में केवल तीन व्यापारिक जहाज ही इस रास्ते से गुजर सके। यह मार्ग दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
वहीं ईरान में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा कारणों और हमलों के बाद कई इलाकों में बिजली और इंटरनेट सेवाओं पर असर पड़ा है। सरकार ने आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर पश्चिम एशिया के तेजी से बदलते घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

