
शरद पूर्णिमा | चांदनी में रखी जाएगी खीर, जानें मिथिला से बंगाल तक की खास परंपराएं
25 अक्टूबर यानी कल शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है। इस बार पर्व को सर्वार्थ सिद्धि योग से भी जोड़ा जा रहा है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पूर्णिमा का खास महत्व है। मिथिला में इसे कोजगरा कहा जाता है, जहां नवविवाहित वर के चुमावन की रस्म निभाई जाती है और पान-मखाना बांटा जाता है।
पश्चिम बंगाल में कोजागरी लक्ष्मी पूजा होती है, जबकि महाराष्ट्र में इसे कोजागिरी पूर्णिमा और ओडिशा में कुमार पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।
कोजागरी नाम को ‘को जागर्ति?’ यानी ‘कौन जाग रहा है?’ से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस रात जागरण करने वाले भक्तों पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है। अलग-अलग परंपराओं के बावजूद शरद पूर्णिमा आस्था, चंद्र-दर्शन और भारतीय लोक-संस्कृति की विविधता का प्रतीक है।
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