करीब 170 स्कूलों से मेधावी विद्यार्थियों का होगा चयन, अतिरिक्त कक्षाएं और नियमित जांच परीक्षा होंगी आयोजित; डिजिटल माध्यम से भी मिलेगा शैक्षणिक सहयोग

चाईबासा: मैट्रिक बोर्ड परीक्षा 2027 में विद्यार्थियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। परीक्षा परिणाम सुधारने के उद्देश्य से स्कूल स्तर से लेकर अनुमंडल स्तर तक विशेष रणनीति तैयार की जा रही है। इसके तहत मेधावी विद्यार्थियों को अतिरिक्त मार्गदर्शन देने के साथ सभी बोर्ड परीक्षार्थियों की कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने पर फोकस किया जाएगा।
बुधवार को उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक हुई। बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारी, जिला शिक्षक संघ के प्रतिनिधि और ऑनलाइन शैक्षणिक सहयोगी संस्था ‘फिलो’ के प्रतिनिधि शामिल हुए।
करीब 170 स्कूलों से चुने जाएंगे मेधावी विद्यार्थी
बैठक में उपायुक्त ने जिले के सभी विद्यालयों को लक्ष्य निर्धारित कर बोर्ड परीक्षा की तैयारी कराने का निर्देश दिया। योजना के तहत जिले के करीब 170 विद्यालयों से प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं की पहचान की जाएगी।
इसके लिए अनुमंडल स्तर पर जांच परीक्षा आयोजित करने की योजना है। परीक्षा के आधार पर चयनित मेधावी विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा। साथ ही उनके लिए अतिरिक्त कक्षाएं और नियमित मूल्यांकन की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे मैट्रिक परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
सभी बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए चलेंगी अतिरिक्त कक्षाएं
जिला प्रशासन की रणनीति केवल मेधावी विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगी। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि मैट्रिक बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित की जाएंगी।
इसके साथ ही समय-समय पर जांच परीक्षाएं भी ली जाएंगी। इन परीक्षाओं के परिणाम के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि विद्यार्थियों को किन विषयों या अध्यायों में अधिक परेशानी हो रही है। इसके बाद संबंधित विषयों पर विशेष ध्यान देकर उनकी कमजोरियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
नियमित मूल्यांकन से कमजोर विषयों पर रहेगा फोकस
स्कूलों को विद्यार्थियों की तैयारी का लगातार मूल्यांकन करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य परीक्षा से पहले ही कमजोर विद्यार्थियों और कठिन विषयों की पहचान करना है, ताकि समय रहते सुधारात्मक कक्षाएं आयोजित की जा सकें।
जिला प्रशासन का फोकस ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें बोर्ड परीक्षा की तैयारी केवल अंतिम महीनों तक सीमित न रहे, बल्कि नियमित पढ़ाई, टेस्ट और मूल्यांकन के जरिए पूरे सत्र में विद्यार्थियों की प्रगति पर नजर रखी जाए।
डिजिटल पढ़ाई का भी मिलेगा लाभ
बैठक में ऑनलाइन शैक्षणिक सहयोगी संस्था ‘फिलो’ ने डिजिटल माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने की अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत की। जिला प्रशासन ने संस्था और विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया है, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को डिजिटल शैक्षणिक संसाधनों और विषय संबंधी मार्गदर्शन का लाभ मिल सके।
पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य मैट्रिक बोर्ड परीक्षा 2027 में जिले के परिणाम को बेहतर बनाना और विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए व्यवस्थित, लक्ष्य आधारित और मजबूत शैक्षणिक तैयारी उपलब्ध कराना है।

