TV Channels May Lose License Renewal After 5 Code Violations Under New Draft Rules
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने टीवी चैनलों और प्रसारण सेवाओं के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनके तहत बार-बार कार्यक्रम और विज्ञापन संबंधी नियमों का उल्लंघन करने वाले चैनलों के लिए लाइसेंस का नवीनीकरण मुश्किल हो सकता है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) द्वारा जारी Telecommunications (Television, Radio and Associated Services) Rules, 2026 के मसौदे में प्रस्ताव रखा गया है कि यदि किसी टीवी चैनल ने अपने लाइसेंस अवधि के दौरान कार्यक्रम संहिता (Programme Code) या विज्ञापन संहिता (Advertising Code) का पांच से अधिक बार उल्लंघन किया है, तो उसके लाइसेंस नवीनीकरण पर सवाल उठ सकते हैं।
क्या कहता है नया ड्राफ्ट?
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार प्रसारण लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए केवल सुरक्षा मंजूरी और कानूनी अनुपालन ही नहीं, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि चैनल ने अपने प्रसारण के दौरान निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन किया या नहीं।
नियम 14 के तहत कहा गया है कि किसी भी अधिकृत प्रसारण संस्था को लाइसेंस नवीनीकरण के लिए यह साबित करना होगा कि उसने अधिकृत शर्तों का गंभीर उल्लंघन नहीं किया है। इसमें कार्यक्रम और विज्ञापन कोड का बार-बार उल्लंघन भी शामिल होगा।
30 मिनट राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम अनिवार्य
ड्राफ्ट में एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल किया गया है। इसके तहत टीवी चैनलों को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट का प्रसारण राष्ट्रीय महत्व और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर करना होगा।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य जनहित से जुड़े विषयों को अधिक प्रसारण समय उपलब्ध कराना है।
एक ही फ्रेमवर्क में आएंगे कई प्लेटफॉर्म
नए नियमों के जरिए सरकार ने सैटेलाइट टीवी चैनल, DTH, HITS (Headend-in-the-Sky), FM रेडियो, कम्युनिटी रेडियो और IPTV जैसी विभिन्न प्रसारण सेवाओं को एकीकृत नियामक ढांचे में लाने का प्रस्ताव रखा है।
यह व्यवस्था Telecommunications Act, 2023 के तहत लागू की जाएगी।
सरकार का दावा
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य प्रसारण क्षेत्र में Ease of Doing Business को बढ़ावा देना, अलग-अलग नियमों को सरल बनाना और पूरे सेक्टर में एक समान नियामक ढांचा लागू करना है।
अभी सुझाव दे सकते हैं हितधारक
सरकार ने इन ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है। संबंधित पक्ष और आम नागरिक 27 जुलाई तक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद सरकार अंतिम नियमों को अधिसूचित कर सकती है।
सबसे बड़ा सवाल
यदि ये नियम लागू होते हैं, तो क्या इससे टीवी चैनलों में जवाबदेही बढ़ेगी या फिर मीडिया की स्वतंत्रता पर नए सवाल खड़े होंगे?



