झारखंड में थर्ड रेल लाइन निर्माण ने पकड़ी रफ्तार, कोयला ढुलाई और रेल संचालन को मिलेगा बड़ा लाभ

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धनबाद-बरवाडीह रेलखंड पर तीसरी लाइन का निर्माण तेजी से जारी है, जिससे झारखंड से कोयला ढुलाई दोगुनी हो जाएगी और यात्री ट्रेनों की समयबद्धता सुधरेगी। 

बरवाडीह (लातेहार): पूर्व मध्य रेलवे (ECR) के धनबाद मंडल के अंतर्गत आने वाले बरवाडीह (सीआईसी) रेलखंड पर तीसरी रेल लाइन का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। रेलवे की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र से देश के विभिन्न हिस्सों तक कोयला और अन्य माल की ढुलाई पहले की तुलना में अधिक तेज और सुगम हो सकेगी। साथ ही यात्री ट्रेनों के संचालन में भी उल्लेखनीय सुधार आने की उम्मीद है।

आधुनिक तकनीक से हो रहा निर्माण

परियोजना का निर्माण अर्बन वे इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आधुनिक मशीनों, अत्याधुनिक तकनीक और अनुभवी इंजीनियरों की देखरेख में किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर दो पालियों में लगातार कार्य जारी है ताकि परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सके।

समय-सीमा और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान

कंपनी प्रबंधन के अनुसार, निर्माण के हर चरण में गुणवत्ता, सुरक्षा और भारतीय रेलवे के तकनीकी मानकों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। सभी कार्य रेलवे के स्वीकृत प्राक्कलन (Estimate) और इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप किए जा रहे हैं। निर्माण स्थल पर नियमित तकनीकी निरीक्षण और त्रिस्तरीय निगरानी प्रणाली लागू की गई है, ताकि गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न हो।

क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?

बरवाडीह रेलखंड धनबाद मंडल के सीआईसी (Coal India Corridor/Coal Indian Cord) सेक्शन का हिस्सा है, जिसे देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसी मार्ग से बड़ी मात्रा में कोयले की ढुलाई विभिन्न राज्यों के बिजली संयंत्रों और उद्योगों तक की जाती है।

यात्री ट्रेनों को भी मिलेगा फायदा

वर्तमान में इस रेलखंड पर डबल लाइन होने के कारण मालगाड़ियों का दबाव काफी अधिक रहता है, जिससे यात्री ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ता है और कई बार ट्रेनें विलंब से चलती हैं। तीसरी लाइन बनने के बाद माल और यात्री ट्रेनों के लिए अलग परिचालन क्षमता बढ़ेगी, जिससे ट्रेनों की समयबद्धता (Punctuality) में सुधार होगा और रेल यातायात अधिक सुचारु बनेगा।

आधुनिक रेल इंफ्रास्ट्रक्चर होगा तैयार

इस परियोजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (Electronic Interlocking) जैसी आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली और मजबूत कंक्रीट स्लीपर्स का उपयोग किया जा रहा है। इससे भारी मालगाड़ियां सुरक्षित तरीके से अधिक गति, लगभग 100 किमी प्रति घंटे तक संचालित की जा सकेंगी।

क्षेत्र के आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना केवल रेल नेटवर्क के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। तीसरी लाइन शुरू होने के बाद मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुरक्षित, तेज और व्यवस्थित होगी। साथ ही मौजूदा रेल यातायात का दबाव कम होने से भविष्य में इस रूट पर अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की भी संभावनाएं बढ़ेंगी।

अधिकारियों ने लिया निर्माण कार्य का जायजा

निर्माण कार्य की प्रगति का निरीक्षण करने के लिए परियोजना स्थल पर मोहम्मद जाहिद, कनिष्ठ अभियंता (जेई) दीपांशु पांडेय, संजय सिंह सहित रेलवे और निर्माण कंपनी के कई वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और तय समय सीमा के भीतर परियोजना पूरी करने के निर्देश दिए।

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