सरना स्थल की संरचना और धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए फ्लाइओवर के डिजाइन में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यहां कंपोजिट स्टील गर्डर तकनीक से निर्माण होगा और सरना स्थल के सामने पिलर नहीं लगाया जाएगा।

रांची: सिरमटोली कनेक्टिंग फ्लाइओवर को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है। सरना स्थल की धार्मिक आस्था और संरचना को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से फ्लाइओवर के डिजाइन में बदलाव किया गया है। अब सरना स्थल के ठीक सामने कोई पिलर नहीं बनाया जाएगा। पथ निर्माण विभाग ने नए डिजाइन के तहत यहां कंपोजिट स्टील गर्डर तकनीक से फ्लाइओवर बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत सरना स्थल के सामने मौजूद सर्विस रोड के ऊपर लगभग 55 मीटर लंबा स्टील गर्डर लगाया जाएगा, जिस पर वाहनों की आवाजाही होगी। सरना स्थल की चहारदीवारी के हिस्से में न तो पाइलिंग की जाएगी और न ही किसी प्रकार का पिलर बनाया जाएगा। दोनों ओर बाउंड्री से सुरक्षित दूरी पर पिलर खड़े किए जाएंगे और उनके बीच स्टील गर्डर स्थापित किया जाएगा।
विभाग के अनुसार, इस नए डिजाइन को अंतिम रूप देने से पहले कई चरणों में तकनीकी सर्वे किया गया। पथ निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने कई बार स्थल निरीक्षण किया, जबकि आईआईटी मुंबई के विशेषज्ञों ने भी दो बार मौके का दौरा कर तकनीकी सुझाव दिए। विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही कंपोजिट स्टील गर्डर तकनीक को सबसे उपयुक्त विकल्प माना गया। यह कनेक्टिंग फ्लाइओवर सिरमटोली और कांटाटोली फ्लाइओवर को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है। परियोजना के तहत दोनों फ्लाइओवर को कैंटिलीवर ब्रिज के माध्यम से जोड़ा जाएगा। पहले सरना स्थल की ओर भी भारी पिलर बनाने की योजना थी, लेकिन नए डिजाइन में इसे पूरी तरह बदल दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से विकास कार्य भी जारी रहेगा और सरना स्थल की धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता भी सुरक्षित रहेगी।

