शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संताली कोर्स शुरू करने की तैयारी, पाठ्यक्रम के लिए विशेषज्ञों की कमेटी गठित; शिक्षकों की भी होगी नियुक्ति

रांची: झारखंड के निजी स्कूलों में अब क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा संताली की पढ़ाई का रास्ता साफ होता दिख रहा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संताली भाषा को निजी स्कूलों में पढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इस दिशा में डीपीएस रांची ने पहल करते हुए राज्य के निजी स्कूलों में सबसे पहले यह कोर्स शुरू करने की तैयारी की है।
सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय, रांची के निर्देश के तहत संबद्ध स्कूलों से संताली भाषा की पढ़ाई को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। इसके तहत आर-1, आर-2 और आर-3 स्तर पर संताली भाषा की पेशकश से संबंधित विवरण मांगा जा रहा है।
कक्षा छह के छात्रों से ली जा रही जानकारी
डीपीएस रांची प्रबंधन ने संताली भाषा पढ़ने के इच्छुक कक्षा छह के विद्यार्थियों की जानकारी उनके अभिभावकों से मांगी है। स्कूल की ओर से प्राप्त विवरण को संकलित कर निर्धारित समय सीमा के भीतर सीबीएसई को भेजा जाएगा। स्कूल प्रबंधन के अनुसार, संताली भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल एक अतिरिक्त विषय उपलब्ध कराना नहीं है। इसके जरिए छात्रों में बहुभाषिक क्षमता, अपनी संस्कृति से जुड़ाव और समग्र व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए बनी विशेषज्ञ समिति
संताली भाषा की पढ़ाई को व्यवस्थित रूप से शुरू करने के लिए स्कूल स्तर पर एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है। यह समिति पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री तैयार करने का काम कर रही है। इसके साथ ही संताली भाषा पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।
विशेषज्ञों ने तैयार की संताली की पाठ्यपुस्तक
डीपीएस रांची की प्राचार्या और सीबीएसई सिटी को-ऑर्डिनेटर डॉ. जया चौहान के अनुसार, स्कूल परिसर में विशेषज्ञों की टीम ने संताली भाषा की पाठ्यपुस्तक तैयार करने का काम किया है। पुस्तक तैयार करने वाली समिति में झारखंड और आसपास के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े नौ विशेषज्ञ शामिल हैं। इनमें संताली भाषा के विश्वविद्यालय स्तर के शिक्षक, स्कूल शिक्षक और सीबीएसई से जुड़े शिक्षाविद शामिल हैं।
समिति में ठाकुर प्रसाद मुर्मू, डॉ. सुशील टुडू, डॉ. जया चौहान, डॉ. शर्मिला सोरेन, संतोष मुर्मू, अमूल ऑगस्टिन हेम्ब्रम, उलिसन मुर्मू, सिल्वेस्टर सोरेन और प्राची दीक्षित शामिल हैं।
निजी स्कूलों में नई शुरुआत
संताली भाषा को निजी स्कूलों में पढ़ाने की यह पहल झारखंड के शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। खासतौर पर राज्य में संताली भाषी विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का अवसर मिलेगा। डीपीएस रांची में पाठ्यक्रम, पुस्तक और शिक्षकों की तैयारी के साथ अब छात्रों की रुचि और संख्या से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। इसके बाद सीबीएसई के निर्देशों के अनुसार आगे की शैक्षणिक प्रक्रिया तय की जाएगी।

