परमाणु वैज्ञानिक, लेखक और विज्ञान संचारक एमपी परमेश्वरन का त्रिशूर में अंतिम संस्कार; लंबे समय से थे बीमार

त्रिशूर। प्रख्यात परमाणु वैज्ञानिक, विज्ञान संचारक, लेखक और वामपंथी विचारक एमपी परमेश्वरन का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे परमेश्वरन ने मंगलवार को केरल के कोट्टाप्पुरम स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। बुधवार को त्रिशूर के परमेक्कावु शांतिघाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
एमपी परमेश्वरन ने अपना जीवन विज्ञान और तकनीकी ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए समर्पित किया। वैज्ञानिक के तौर पर करियर शुरू करने के बाद उन्होंने विज्ञान संचार और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में किया काम
18 जनवरी 1935 को जन्मे परमेश्वरन ने वर्ष 1956 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1965 में मॉस्को पावर इंस्टीट्यूट से परमाणु इंजीनियरिंग में पीएचडी हासिल की। वर्ष 1957 से 1975 तक उन्होंने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में वैज्ञानिक के तौर पर काम किया। वैज्ञानिक क्षेत्र में काम करने के बाद उन्होंने अपना ध्यान विज्ञान को समाज और आम लोगों से जोड़ने पर केंद्रित किया।
विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान
परमेश्वरन केरल शास्त्र साहित्य परिषद (KSSP) से जुड़े और इसके पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में विज्ञान को आम लोगों की भाषा में पहुंचाने के अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने और समाज में विज्ञान की समझ विकसित करने के लिए लंबे समय तक काम किया।n वह 1975 से 1984 तक चिंथा साप्ताहिक के संपादक भी रहे। लेखन के जरिए उन्होंने विज्ञान, समाज, पर्यावरण और विकास से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखी।
विचारों को लेकर सीपीएम में हुआ विवाद
एमपी परमेश्वरन के विचारों में सत्ता के विकेंद्रीकरण और पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया। उनकी चर्चित पुस्तक ‘चौथी दुनिया: सपना और वास्तविकता’ में भी इन मुद्दों पर जोर दिया गया था। उनके विचारों को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीएम के भीतर भी तीखी बहस हुई। बाद में वर्ष 2004 में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। विज्ञान को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए एमपी परमेश्वरन को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

