Rath Yatraराजधानी रांची में भगवान जगन्नाथ की घुरती रथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है। नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में विराजमान रहने के बाद आज भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने मुख्य मंदिर लौटेंगे। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। घुरती रथ यात्रा की यह परंपरा रांची की 335 वर्षीय ऐतिहासिक रथ यात्रा का समापन है ।
मंदिर समिति के अनुसार, दोपहर 2:50 बजे रथ खींचने की परंपरा शुरू होगी। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद भगवानों की वापसी यात्रा प्रारंभ होगी और श्रद्धालु पूरे मार्ग में जयघोष के साथ रथ को खींचेंगे । रथ यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। मुख्य मंदिर पहुंचने के बाद भगवानों का पारंपरिक विधि-विधान से स्वागत किया जाएगा। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था भी की जाएगी। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्ग और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
रांची की ऐतिहासिक रथ यात्रा की परंपरा
रांची की रथ यात्रा देश की सबसे पुरानी रथ यात्राओं में गिनी जाती है । इसकी शुरुआत वर्ष 1691 में नागवंशी शासक ऐनीनाथ शाहदेव ने की थी। पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर से प्रेरित होकर उन्होंने जगन्नाथपुर पहाड़ी पर मंदिर का निर्माण कराया और उसी परंपरा के अनुरूप यहां रथ यात्रा की शुरुआत की । जगन्नाथपुर मंदिर की वास्तुकला और पूजा-पद्धति पुरी के जगन्नाथ मंदिर से काफी हद तक मेल खाती है ।
16 जुलाई 2026 को 335वीं ऐतिहासिक रथ यात्रा निकाली गई थी, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया । इस यात्रा में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हुए थे और उन्होंने भविष्य में रथ यात्रा मेले को और भव्य बनाने की घोषणा की थी ।
घुरती रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
घुरती रथ यात्रा, जिसे बहुड़ा यात्रा के नाम से भी जाना जाता है, रथ यात्रा का समापन है । नौ दिनों तक भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा मौसीबाड़ी (मौसी के घर) में विराजमान रहते हैं, जहां वे भक्तों को दर्शन देते हैं । इसके बाद वे अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं।
श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवानों की वापसी यात्रा के दौरान रथ खींचना और इस यात्रा का साक्षी बनना भी उतना ही पुण्यकारी है जितना मुख्य रथ यात्रा में भाग लेना । लोकविश्वास है कि भगवान के रथ की रस्सी खींचना उनके आशीर्वाद और पुण्य का भागी बनना है ।
घुरती रथ यात्रा का कार्यक्रम
मंदिर समिति के अनुसार, दोपहर 2:50 बजे रथ खींचने की परंपरा शुरू होगी। इससे पहले मौसीबाड़ी में पारंपरिक पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे । भगवानों के विग्रहों को पहंडी (विशेष शोभायात्रा) के साथ रथ पर स्थापित किया जाएगा ।
रथ यात्रा के मार्ग पर सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं । भारी वाहनों को मार्ग पर कई घंटों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है । सुरक्षाकर्मी और स्वयंसेवक भीड़ प्रबंधन के लिए तैनात किए गए हैं । मुख्य मंदिर पहुंचने के बाद भगवानों का पारंपरिक विधि-विधान से स्वागत किया जाएगा और श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था भी की जाएगी।
रथ यात्रा के मेले का आयोजन
रथ यात्रा के साथ नौ दिवसीय मेले का आयोजन भी किया जाता है, जहां आस्था, लोकसंस्कृति और जनजीवन का अनुपम संगम दिखाई देता है । मेले में झूले, खान-पान की दुकानें, मिठाइयों, खिलौनों, हस्तशिल्प, कपड़ों और स्थानीय व्यंजनों की दुकानें लगती हैं ।
पारंपरिक कठपुतली नृत्य और लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां मेले की खास आकर्षण होती हैं। रथ यात्रा के अवसर पर पूरे मेला परिसर में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया है। हर वर्ष आयोजित होने वाली यह घुरती रथ यात्रा रांची की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
बाहरी संसाधन
जगन्नाथपुर मंदिर और रांची रथ यात्रा के बारे में अधिक जानकारी के लिए:
- रांची जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट: https://ranchi.nic.in
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