यूजीसी 2022 के नियमों के आधार पर तैयार हुआ नया प्रावधान; प्रोफेसर 8, एसोसिएट प्रोफेसर 6 और असिस्टेंट प्रोफेसर 4 शोधार्थियों को करा सकेंगे पीएचडी

रांची: रांची यूनिवर्सिटी में पीएचडी करने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीएचडी डिग्री के लिए नया रेगुलेशन जारी कर दिया है। Regulation and Standard Operating Procedure for the Minimum Standard and Procedure for Award of PhD Degree-2026 को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किया गया है।
नया रेगुलेशन यूजीसी के 2022 के नियमों, नई शिक्षा नीति और चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसके लागू होने के बाद विश्वविद्यालय पीएचडी में प्रवेश के लिए अपनी प्रवेश परीक्षा आयोजित कर सकेगा।
पीएचडी में दाखिले के लिए क्या होगी योग्यता?
नए नियम के मुताबिक पीएचडी में प्रवेश लेने के लिए अभ्यर्थी का संबंधित विषय में स्नातकोत्तर होना जरूरी होगा। पोस्ट ग्रेजुएशन में कम से कम 55 प्रतिशत अंक अनिवार्य किए गए हैं। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को निर्धारित अंकों में 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यानी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को प्रवेश के लिए नियमानुसार राहत मिलेगी।
एक प्रोफेसर कितने छात्रों को करा सकेंगे पीएचडी?
नए रेगुलेशन में शोधार्थियों की संख्या को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। इसके तहत एक समय में—
- प्रोफेसर: अधिकतम 8 शोधार्थी
- एसोसिएट प्रोफेसर: अधिकतम 6 शोधार्थी
- असिस्टेंट प्रोफेसर: अधिकतम 4 शोधार्थी
को अपने निर्देशन में पीएचडी करा सकेंगे। इससे शोधार्थियों के लिए गाइड आवंटन और शोध कार्य की निगरानी को व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कम से कम 3 साल में जमा करनी होगी थीसिस
नए नियमों के अनुसार पीएचडी पूरी करने के लिए शोधार्थी को न्यूनतम 3 वर्ष का समय मिलेगा। वहीं थीसिस जमा करने की अधिकतम अवधि 6 वर्ष तय की गई है। यदि किसी विशेष परिस्थिति में तय समयसीमा के भीतर शोध पूरा नहीं हो पाता है, तो नियमों के तहत अधिकतम 2 वर्ष का अतिरिक्त विस्तार दिया जा सकेगा। इस तरह विशेष परिस्थिति में कुल अवधि 8 वर्ष तक हो सकती है। महिला शोधार्थियों के लिए भी नियमों में विशेष प्रावधान और निर्धारित छूट का प्रावधान रखा गया है।
रिटायर होने पर शिक्षक बनेंगे को-गाइड
नए रेगुलेशन में पीएचडी गाइड को लेकर भी महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। अगर किसी शोधार्थी के गाइड शिक्षक शोध कार्य पूरा होने से पहले सेवानिवृत्त हो जाते हैं, तो वे गाइड की भूमिका से हटकर को-गाइड के रूप में जुड़े रह सकेंगे। वहीं, निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत शोधार्थी को अपना गाइड बदलने की सुविधा भी दी जाएगी।
13 सदस्यीय कमेटी ने तैयार किया रेगुलेशन
रांची यूनिवर्सिटी के नए पीएचडी रेगुलेशन को तैयार करने के लिए कुलपति प्रो. सरोज शर्मा के निर्देशन में 13 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई थी। विश्वविद्यालय के सोशल साइंस डीन सह रिसर्च डायरेक्टर डॉ. परवेज हसन की देखरेख में कमेटी ने यूजीसी के प्रावधानों का अध्ययन कर रेगुलेशन तैयार किया। विश्वविद्यालय के अनुसार कमेटी ने करीब एक माह नौ दिन में इस प्रक्रिया को पूरा किया।
पिछली पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पर लगी थी रोक
रांची यूनिवर्सिटी में इससे पहले पीएचडी प्रवेश परीक्षा को लेकर विवाद की स्थिति बनी थी। रेगुलेशन स्वीकृत नहीं होने के कारण पिछली बार पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित करने पर राज्यपाल की ओर से रोक लगाई गई थी। विश्वविद्यालय को यूजीसी रेगुलेशन-2022 के अनुरूप नया नियम तैयार करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों से लिया गया 2 हजार रुपये का शुल्क भी वापस करना पड़ा था।
अब पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद
नया रेगुलेशन जारी होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। अब विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी अगली प्रक्रिया की जानकारी जारी कर सकता है।
शोधार्थियों की नजर अब इस बात पर है कि पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन कब शुरू होते हैं और परीक्षा की तारीख क्या तय की जाती है। नए रेगुलेशन के लागू होने से विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश और शोध कार्य को यूजीसी के नए मानकों के अनुरूप संचालित करने का रास्ता तैयार हो गया है।

