वेतन से PF कटौती के बावजूद राशि भविष्य निधि खाते में जमा नहीं होने का आरोप। कम ब्याज और टैक्स के कारण कर्मचारियों को भारी आर्थिक नुकसान, ऑडिट की उठी मांग।

रांची: झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में भविष्य निधि (PF) से जुड़ी एक बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आई है। आरोप है कि करीब 1,800 शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों की PF राशि वर्षों से निर्धारित भविष्य निधि खाते में जमा करने के बजाय सामान्य बचत खाते में रखी गई, जिससे कर्मचारियों को ₹100 करोड़ से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है।
PF कटता रहा, लेकिन नहीं मिला पूरा लाभ
जानकारी के अनुसार कर्मचारियों के वेतन से हर महीने नियमित रूप से PF की राशि काटी जाती रही, लेकिन उसे PF खाते में जमा करने के बजाय साधारण बचत खाते में रखा गया। इसके कारण कर्मचारियों को PF पर मिलने वाली ऊंची ब्याज दर का लाभ नहीं मिल सका।
जहां PF खाते पर करीब 8 से 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलता है, वहीं बचत खाते में केवल 2.7 से 3.5 प्रतिशत ब्याज मिलता है। इससे कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली कुल राशि भी प्रभावित हुई है।
कम ब्याज के साथ टैक्स का भी बोझ
इस व्यवस्था का एक और बड़ा असर यह है कि बचत खाते पर मिलने वाला ब्याज आयकर के दायरे में आता है, जबकि निर्धारित सीमा तक PF पर मिलने वाला ब्याज सामान्यतः करमुक्त होता है। ऐसे में कर्मचारियों को न केवल कम ब्याज मिला, बल्कि उस पर टैक्स भी चुकाना पड़ा।
ऐसे समझें कितना हो रहा है नुकसान
यदि किसी कर्मचारी की जमा राशि 5 लाख रुपये है, तो PF खाते में 8 प्रतिशत ब्याज के हिसाब से उसे एक वर्ष में लगभग 40 हजार रुपये मिलते। लेकिन वही राशि यदि बचत खाते में रखी जाए और 2.7 प्रतिशत ब्याज मिले, तो सालाना ब्याज केवल 13,500 रुपये बनता है।
यानी केवल ब्याज के रूप में ही 26,500 रुपये का नुकसान होता है। इसके अलावा यदि यह ब्याज आयकर के दायरे में आता है, तो टैक्स और उपकर मिलाकर लगभग 4,200 रुपये अतिरिक्त कट सकते हैं। इस तरह एक कर्मचारी को हर साल करीब 30 हजार रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ऑडिट और जवाबदेही की मांग तेज
शिक्षक और कर्मचारी संगठनों ने पूरे मामले की वित्तीय और प्रशासनिक ऑडिट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि PF की राशि कितने समय तक बचत खातों में रखी गई, कर्मचारियों को वास्तव में कितना ब्याज मिलना चाहिए था और उन्हें कुल कितना आर्थिक नुकसान हुआ। संगठनों ने राज्य सरकार और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोष तय करने तथा प्रभावित कर्मचारियों को उनका वित्तीय नुकसान ब्याज सहित वापस दिलाने की मांग की है।

