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Palamu Tiger Reserve: जंगल बचाने के साथ बदल रही आदिवासियों की जिंदगी, जानें कैसे

By Team Abua
August 11, 2026 5 Min Read
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Palamu Tiger Reserve: जंगल बचाने के साथ बदल रही आदिवासियों की जिंदगी, जानें कैसे

झारखंड का एकमात्र Palamu Tiger Reserve (PTR) इन दिनों सिर्फ बाघों के संरक्षण को लेकर ही नहीं, बल्कि जंगलों के बीच रहने वाले आदिवासी परिवारों की जिंदगी में बदलाव लाने की कोशिशों को लेकर भी चर्चा में है। Palamu Tiger Reserve प्रबंधन का मानना है कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा तभी लंबे समय तक सफल हो सकती है, जब स्थानीय समुदाय भी इस संरक्षण व्यवस्था का हिस्सा बनें। इसी सोच के साथ Palamu Tiger Reserve में ‘जनभागीदारी से वन संरक्षण’ और ‘हुनर से रोजगार’ जैसी पहलों पर काम किया जा रहा है।

विषय सूची

  1. Palamu Tiger Reserve में महुआ संग्रह की नई तकनीक
  2. ‘बाघ दीदी’ और ‘वनजीवी दीदी’ : महिलाओं को मिली नई पहचान
  3. Palamu Tiger Reserve में इको-टूरिज्म से रोजगार के नए रास्ते
  4. सांस्कृतिक आस्था और संरक्षण का संगम
  5. Palamu Tiger Reserve में स्वैच्छिक पुनर्वास की पहल

1. Palamu Tiger Reserve में महुआ संग्रह की नई तकनीक

Palamu Tiger Reserve क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत महुआ संग्रह है। पहले महुआ इकट्ठा करने के लिए कई जगहों पर पेड़ों के नीचे गिरी पत्तियों को हटाने के लिए आग लगाने की परंपरा रही है। इससे जंगल और छोटे वन्यजीवों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता था। Palamu Tiger Reserve की रिपोर्ट के अनुसार, रिजर्व में आग लगने की 90% से अधिक घटनाएं महुआ के पेड़ों के आसपास के इलाकों से शुरू होती थीं ।

इसी समस्या को देखते हुए Palamu Tiger Reserve प्रबंधन ने जाली (एग्रो-नेट) मॉडल को बढ़ावा दिया है। इसमें महुआ के पेड़ों के नीचे जाल बिछाया जाता है, जिससे गिरे हुए महुआ को बिना आग लगाए आसानी से इकट्ठा किया जा सके । इस पहल का असर यह हुआ है कि ग्रामीणों को अब 30-35 रुपये प्रति किलो की जगह 80 रुपये प्रति किलो तक की कीमत मिल रही है । Palamu Tiger Reserve के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना के अनुसार, “इस नई व्यवस्था के तहत महुआ के फूल पहले जाल पर सुखाए जाते हैं और फिर ऊंचे प्लेटफॉर्म पर 3-4 दिनों के लिए धूप में सुखाए जाते हैं। इस तरीके से फूल साफ रहते हैं और फूड-ग्रेड क्वालिटी प्राप्त करते हैं” ।

2. ‘बाघ दीदी’ और ‘वनजीवी दीदी’ : महिलाओं को मिली नई पहचान

Palamu Tiger Reserve में महिलाओं को वन संरक्षण और स्थानीय रोजगार से जोड़ने के लिए ‘बाघ दीदी’ और ‘वनजीवी दीदी’ जैसी पहल शुरू की गई है । Palamu Tiger Reserve के दक्षिणी डिवीजन में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई ‘वनजीवी दीदी’ पहल के तहत 17 गांवों से 18-18 शिक्षित महिलाओं का चयन किया गया है । ये महिलाएं पर्यावरण शिक्षक और संरक्षण सुविधाकर्ता के रूप में काम कर रही हैं ।

Palamu Tiger Reserve प्रबंधन के अनुसार, इन महिलाओं को 3,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है । वे ग्रामीणों को वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ अवैध शिकार और अवैध कटाई जैसी गतिविधियों को रोकने में भी मदद कर रही हैं । Palamu Tiger Reserve के अधिकारियों का कहना है कि ‘बाघ दीदी’ बाघों के संरक्षण के लिए ग्रामीणों को जागरूक करती हैं और साथ ही स्थानीय आबादी को स्वरोजगार से भी जोड़ रही हैं ।

3. Palamu Tiger Reserve में इको-टूरिज्म से रोजगार के नए रास्ते

Palamu Tiger Reserve की ओर से ‘हुनर से रोजगार’ कार्यक्रम के तहत स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा जा रहा है । इस पहल के तहत चार आदिवासी महिलाओं को पहली बार बेतला नेशनल पार्क में टूरिस्ट गाइड के रूप में नियुक्त किया गया है । Palamu Tiger Reserve के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना के अनुसार, नवंबर 2024 में इस कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से आठ समूहों में लगभग 250 युवाओं को इलेक्ट्रीशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर, वाहन चालक आदि के रूप में प्रशिक्षित किया गया है ।

Palamu Tiger Reserve की इस पहल से न केवल स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते खुले हैं, बल्कि यह पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की कोशिश भी है। Palamu Tiger Reserve प्रबंधन का अगले तीन वर्षों में लगभग 2,500 ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार देने का लक्ष्य है ।

4. सांस्कृतिक आस्था और संरक्षण का संगम

Palamu Tiger Reserve प्रबंधन ने आदिवासी समुदायों की पारंपरिक मान्यताओं को भी वन संरक्षण से जोड़ने की कोशिश की है। इसके तहत ‘बाघ देवता’ पहल के माध्यम से गांवों के सरना स्थलों और पवित्र उपवनों के संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। आदिवासी लोककथाओं और परंपराओं में बाघ को कई जगहों पर रक्षक के रूप में देखा जाता है। Palamu Tiger Reserve इसी सांस्कृतिक जुड़ाव को संरक्षण की मुहिम का हिस्सा बनाकर स्थानीय समुदाय और वनकर्मियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश कर रहा है ।

Palamu Tiger Reserve का ऐतिहासिक महत्व भी इसे खास बनाता है। यह 1973 में देश के पहले नौ टाइगर रिजर्व में से एक है । बाघ संरक्षण को लेकर रिजर्व के गठन के बाद सबसे पहली बैठक Palamu Tiger Reserve में ही हुई थी ।

5. Palamu Tiger Reserve में स्वैच्छिक पुनर्वास की पहल

Palamu Tiger Reserve के कोर एरिया में रहने वाले ग्रामीण परिवारों के लिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के दिशा-निर्देशों के तहत स्वैच्छिक पुनर्वास की प्रक्रिया भी चल रही है । Palamu Tiger Reserve के कोर जोन के जैगीर गांव का विस्थापन हाल ही में पूरा किया गया है। विस्थापित परिवारों को पोलपोल के पास सड़क, बिजली और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ बसाया जा रहा है।

Palamu Tiger Reserve के पुनर्वास पैकेज के तहत पात्र परिवारों को प्रति परिवार 15 लाख रुपये तक का मुआवजा या भूमि विकल्प दिए जाने की व्यवस्था बताई गई है। इसका उद्देश्य कोर क्षेत्र में मानवीय दबाव कम करना और वन्यजीवों के लिए ज्यादा सुरक्षित क्षेत्र तैयार करना है।

Palamu Tiger Reserve की यह पहल इस सोच पर आधारित है कि वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सहयोगी बन सकते हैं। Palamu Tiger Reserve के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना के अनुसार, जंगल में रहने वाले आदिवासी परिवारों के जीवन स्तर में सुधार किए बिना संरक्षण के प्रयासों को स्थायी सफलता नहीं मिल सकती । इसलिए, Palamu Tiger Reserve अब संरक्षण की कहानी को आजीविका और सामुदायिक विकास के साथ जोड़कर एक नया मॉडल पेश कर रहा है।

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