ईरान से बातचीत में अमेरिका की मुआवजे की मांग ने बढ़ाई अनिश्चितता, होर्मुज में शिपिंग प्रभावित होने से सप्लाई रिस्क को लेकर बाजार सतर्क

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का असर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में लगातार चौथे कारोबारी दिन तेजी दर्ज की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के सामने रखी गई नई शर्त के बाद बाजार में यह आशंका बढ़ गई है कि दोनों देशों के बीच किसी समझौते तक पहुंचने में अभी वक्त लग सकता है।
ट्रंप ने ईरान से युद्ध में मारे गए लोगों के लिए अमेरिका को मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने संकेत दिया है कि आगे होने वाली बातचीत में यह मांग प्रमुख शर्त के तौर पर रखी जाएगी। ट्रंप के इस बयान के बाद ट्रेडर्स के बीच ईरान-अमेरिका तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ब्रेंट 88 डॉलर के करीब, WTI भी चढ़ा
बाजार में तेजी के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। इससे पिछले कारोबारी सत्र में भी ब्रेंट की कीमत में करीब 5 फीसदी की जोरदार बढ़ोतरी हुई थी। वहीं, अमेरिकी क्रूड बेंचमार्क West Texas Intermediate यानी WTI करीब 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहा।
फिलहाल बाजार की सबसे बड़ी नजर इस बात पर है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की सामान्य आवाजाही कब बहाल होती है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से अभी जहाजों की आवाजाही काफी कम है।
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापारिक मार्गों में से एक है। युद्ध शुरू होने से पहले वैश्विक तेल और LNG शिपमेंट का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था। यही वजह है कि अगर इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई को लेकर दबाव बढ़ सकता है। शिपिंग सामान्य होने में जितनी देरी होगी, ट्रेडर्स की चिंता और सप्लाई रिस्क पर नजर उतनी ही मजबूत बनी रहेगी।
ईरान की ओर से भी ओमान के साथ किसी संभावित समझौते के लिए मुआवजे और अमेरिका की नाकेबंदी खत्म करने जैसी शर्तों की बात सामने आई है। ऐसे में ट्रंप की नई मांग दोनों देशों के बीच बातचीत को और जटिल बना सकती है।
कच्चे तेल के साथ डीजल बाजार पर भी दबाव
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर केवल कच्चे तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है। रिफाइनरी संचालन और डीजल सप्लाई पर भी इसका दबाव देखने को मिल रहा है। इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बना दबाव भी बाजार की चिंता बढ़ा रहा है। यूरोप के डीजल बाजार में इसका असर खास तौर पर दिखाई दिया। सोमवार को यूरोपीय डीजल फ्यूचर्स में करीब 9 फीसदी की तेजी दर्ज की गई, जो जुलाई की शुरुआत के बाद एक दिन में हुई सबसे बड़ी बढ़ोतरी बताई गई।
रेड सी में भी बढ़ रहा शिपिंग रिस्क
ऊर्जा आपूर्ति को लेकर जोखिम सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं है। रेड सी क्षेत्र में भी शिपिंग को लेकर खतरा बढ़ गया है। ईरान समर्थित हूती लड़ाकों की ओर से जहाजों और ऊर्जा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की धमकी दी गई है।
IIR Energy के मुताबिक, हमले के बाद सऊदी अरामको ने जजान रिफाइनरी को दोबारा शुरू करने की समयसीमा बढ़ाकर अगस्त के अंत तक कर दी है। इससे क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंता और बढ़ी है।
ट्रंप की मुआवजे वाली मांग क्यों अहम?
ट्रंप ने कहा है कि ईरान से मुआवजे की मांग पहले हुई बातचीत का हिस्सा नहीं थी। हालांकि, जून में जारी एक मेमोरेंडम में ईरान में युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए संभावित 300 अरब डॉलर के फंड का जिक्र किया गया था।
अब मुआवजे की नई मांग ने दोनों देशों के बीच बातचीत को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से ईरान-अमेरिका वार्ता, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग और मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति पर निर्भर करेगी।

