
तिरंगा फहराने के लिए किसी की अनुमति जरूरी नहीं! Delhi High Court में Neha Bora की दलील, ₹10,000 के Peace Bond पर फैसला कल

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026 | अबुआ न्यूज़ झारखंड/Chandni Jha
resented by Neha Bora regarding the right to hoist the national flag without requiring prior permission. Bora contends that such a requirement infringes upon individual freedoms guaranteed under the Constitution. The court’s decision on the peace bond of ₹10,000 is anticipated tomorrow, which may set a significant precedent for future cases related to the exhibition of national symbols. Legal observers are closely monitoring the proceedings, given their potential implications for civic liberties.
Neha Bora Delhi High Court Case: राष्ट्रीय ध्वज फहराने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। All India Students’ Association (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के नोटिस को चुनौती देते हुए अदालत में दलील दी कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।
मामला दिल्ली पुलिस द्वारा जारी उस नोटिस से जुड़ा है, जिसमें नेहा बोरा को शांति बनाए रखने के लिए ₹10,000 का Personal Bond और एक जमानतदार देने को कहा गया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। Justice Subramonium Prasad की अदालत इस मामले में 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को शाम 6 बजे फैसला सुनाएगी।
तिरंगा फहराने के लिए अनुमति क्यों? अदालत में उठाया सवाल
गुरुवार को सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन (Gopal Sankaranarayanan) ने दिल्ली पुलिस के नोटिस के कानूनी आधार पर सवाल उठाए।
उन्होंने अदालत में कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए नागरिकों को अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।
उनकी दलील थी कि किसी नागरिक द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा फहराना अपने आप में कानून-व्यवस्था के लिए खतरा नहीं माना जा सकता।
वकील ने यह भी सवाल उठाया कि क्या केवल विरोध प्रदर्शन में शामिल होने या प्रदर्शन का आह्वान करने के आधार पर किसी व्यक्ति को शांति भंग होने की आशंका से जोड़कर कार्रवाई की जा सकती है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 16 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में आयोजित विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है।
नेहा बोरा और AISA के कार्यकर्ता उस दिन मंडी हाउस इलाके में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए थे। यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया और विरोध प्रदर्शन से जुड़े प्रतिबंधों के खिलाफ उठाई जा रही आपत्तियों की पृष्ठभूमि में आयोजित हुआ था।
दिल्ली पुलिस ने 16 अक्टूबर को नेहा बोरा को हिरासत में लिया था। उन्हें अगले दिन सुबह रिहा किया गया।
इसके बाद 17 अक्टूबर को Special Executive Magistrate (SEM) की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया गया।
नोटिस में आरोप लगाया गया कि नेहा बोरा ने मंडी हाउस में नारेबाजी की, पहले भी प्रतिबंधात्मक आदेशों के बावजूद विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया और कनॉट प्लेस के Central Park में बिना अनुमति प्रदर्शन तथा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए लोगों को प्रेरित किया।
नेहा बोरा ने इन आरोपों को चुनौती दी है।
₹10,000 का Peace Bond भरने का नोटिस
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) की धारा 126 के तहत शुरू की गई थी।
इस प्रावधान के अंतर्गत शांति भंग होने की आशंका से जुड़ी परिस्थितियों में संबंधित व्यक्ति को कारण बताने का नोटिस जारी किया जा सकता है।
नेहा बोरा को निर्देश दिया गया था कि वह Special Executive Magistrate के सामने उपस्थित होकर स्पष्ट करें कि उनसे ₹10,000 का Personal Bond और एक Surety क्यों नहीं लिया जाना चाहिए।
नेहा बोरा ने इस नोटिस को कानूनी रूप से अनुचित बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
उनकी याचिका में नोटिस रद्द करने और पुलिस को उनके खिलाफ जबरन कार्रवाई करने से रोकने की मांग की गई है।
नेहा बोरा का आरोप, शांतिपूर्ण विरोध को दबाने की कोशिश
नेहा बोरा ने अपनी याचिका में दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई शांतिपूर्ण असहमति और विरोध प्रदर्शन को रोकने का प्रयास है।
उनका कहना है कि नोटिस में ऐसे ठोस तथ्यों का उल्लेख नहीं है, जिनसे यह साबित हो कि उनके कारण सार्वजनिक शांति भंग होने की वास्तविक आशंका थी।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान के तहत संरक्षित अधिकार हैं।
उनकी ओर से कहा गया कि Preventive Powers का इस्तेमाल केवल इस आशंका पर नहीं किया जाना चाहिए कि कोई व्यक्ति भविष्य में विरोध प्रदर्शन कर सकता है।
हालांकि, ये नेहा बोरा की ओर से अदालत में रखी गई दलीलें हैं। इन पर अंतिम निर्णय अदालत को करना है।
Delhi Police ने अदालत में क्या कहा?
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश Additional Solicitor General चेतन शर्मा (Chetan Sharma) ने नेहा बोरा की याचिका की सुनवाई योग्य होने पर सवाल उठाए।
पुलिस का पक्ष था कि संबंधित कार्रवाई सार्वजनिक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।
सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि नोटिस जारी करने से पहले पुलिस रिपोर्ट, पूर्व घटनाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों पर विचार किया गया था।
दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया कि नेहा बोरा पहले भी प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन से संबंधित गतिविधियों में शामिल रही हैं।
वहीं नेहा बोरा के वकील ने इन आरोपों और नोटिस की वैधानिकता को चुनौती दी।
Central Park के प्रदर्शन से संबंध होने से इनकार
सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि उनका प्रदर्शन मंडी हाउस में आयोजित किया गया था।
उनके वकील ने दिल्ली पुलिस के उस आरोप का विरोध किया, जिसमें उन्हें कनॉट प्लेस के Central Park में आयोजित अलग प्रदर्शन से जोड़ा गया था।
बचाव पक्ष का कहना था कि मंडी हाउस में आयोजित कार्यक्रम और Central Park में प्रदर्शन का आह्वान अलग-अलग घटनाएं थीं।
इस मुद्दे पर दोनों पक्षों ने अदालत के सामने अपनी-अपनी दलीलें रखीं।
संविधान के Article 19 और Article 21 पर भी चर्चा
इस मामले में संविधान के दो महत्वपूर्ण प्रावधान चर्चा के केंद्र में रहे।
Article 19: नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, इन अधिकारों पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
Article 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण से संबंधित है।
नेहा बोरा की ओर से दलील दी गई कि बिना पर्याप्त कानूनी आधार के Peace Bond की कार्यवाही शुरू करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को प्रभावित कर सकता है।
अदालत ने भी इस बात पर विचार किया कि जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित होने की संभावना हो, तब निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन कितना आवश्यक है।
क्या राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए अनुमति जरूरी है?
भारत में राष्ट्रीय ध्वज फहराने से जुड़े नियम Flag Code of India और संबंधित कानूनों के अंतर्गत आते हैं।
सामान्य रूप से नागरिक राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और निर्धारित नियमों का पालन करते हुए तिरंगा फहरा सकते हैं।
हालांकि, किसी सार्वजनिक स्थान पर सभा, जुलूस या प्रदर्शन आयोजित करने के लिए स्थानीय कानूनों और परिस्थितियों के अनुसार अलग अनुमति या प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।
यही अंतर इस मामले को महत्वपूर्ण बनाता है।
नेहा बोरा की ओर से तर्क दिया गया है कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने को अपने आप में ऐसा कार्य नहीं माना जा सकता, जिसके आधार पर शांति भंग होने की आशंका जताई जाए।
23 अक्टूबर को शाम 6 बजे आएगा फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को नेहा बोरा और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश दलीलों को सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
Justice Subramonium Prasad ने कहा कि इस मामले में 23 अक्टूबर को शाम 6 बजे फैसला सुनाया जाएगा।
अदालत के फैसले से यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित Peace Bond नोटिस और उसके लिए अपनाई गई प्रक्रिया कानून के अनुरूप थी या नहीं।
यह मामला केवल एक छात्र नेता और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद तक सीमित नहीं है। इसमें शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, पुलिस की Preventive Powers, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी सवाल भी शामिल हैं।
फिलहाल अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है।




