
न सियासत, न VIP अंदाज! कभी ढेंकी चलातीं, कभी मछली पकड़तीं दिखीं Kalpana Soren
Beyond Politics: Kalpana Soren Embraces Village Traditions, Tries Traditional Dhenki and Holds Fresh Fish in Nemra

रामगढ़/रांची: राजनीति की व्यस्त दुनिया से अलग झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन का एक बेहद सहज और पारंपरिक अंदाज सामने आया है। कभी गांव की पुरानी ढेंकी के पास चावल तैयार करतीं, तो कभी तालाब किनारे मछलियों को हाथों में थामे नजर आतीं कल्पना सोरेन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा बटोर रही हैं।
ढेंकी के साथ दिखा झारखंड की ग्रामीण परंपरा से जुड़ाव
गुलाबी साड़ी पहने कल्पना सोरेन तस्वीरों में पारंपरिक ढेंकी के पास नजर आ रही हैं। एक तस्वीर में वह ढेंकी के पास अनाज संभाल रही हैं, तो दूसरी में लकड़ी से बने इस पुराने ग्रामीण उपकरण को चलाने का प्रयास करती दिखाई देती हैं।
ढेंकी झारखंड की ग्रामीण संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। पुराने समय में गांवों में धान कूटने और चावल तैयार करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता था। आधुनिक मशीनों के आने के बाद इसका उपयोग कम हुआ है, लेकिन यह आज भी पारंपरिक ग्रामीण जीवन की पहचान है।
रिपोर्ट के अनुसार, कल्पना सोरेन ने तस्वीरों के साथ अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश भी दिया।
हाथों में मछली, चेहरे पर मुस्कान
इन तस्वीरों का दूसरा दिलचस्प पहलू गांव के तालाब से जुड़ा है। कल्पना सोरेन मछलियों को अपने हाथों में थामे नजर आ रही हैं। आसपास ग्रामीण और अन्य लोग भी मौजूद हैं।
झारखंड के ग्रामीण जीवन में तालाब और मत्स्य पालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में इन तस्वीरों में गांव की जीवनशैली और पारंपरिक गतिविधियों की झलक देखने को मिलती है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कल्पना सोरेन ने मछलियों वाली तस्वीरों के साथ केवल ‘गांव’ शब्द लिखा था।
पारिवारिक शोक के बीच परंपराओं से जुड़ाव
हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन के निधन के बाद पूरा परिवार पैतृक गांव नेमरा में पारंपरिक श्राद्धकर्म में शामिल हुआ था।
इस दौरान कल्पना सोरेन ने परिवार की अन्य महिलाओं के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के निर्वहन में भी भाग लिया। 16 अक्टूबर की प्रकाशित रिपोर्ट में श्राद्धकर्म के दौरान भोजन तैयार करने में उनकी भागीदारी का उल्लेख है।
कसमार में खुद चाय बनाकर भी आई थीं चर्चा में
इससे पहले 20 अक्टूबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ बोकारो जिले के कसमार पहुंचीं कल्पना सोरेन का एक और अनौपचारिक अंदाज सामने आया था।
स्थानीय चाय-पकौड़ी की दुकान पर उन्होंने स्वयं चाय बनाई थी। मुख्यमंत्री और कल्पना सोरेन ने वहां ग्रामीणों से मुलाकात की और स्थानीय व्यंजनों का आनंद लिया।
बदलते दौर में अपनी जड़ों को याद रखने का संदेश
गांव की ढेंकी, तालाब और ग्रामीणों के बीच कल्पना सोरेन की ये तस्वीरें झारखंड की उस जीवनशैली की झलक देती हैं, जहां परंपराएं आज भी सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इन तस्वीरों का आकर्षण केवल किसी राजनीतिक हस्ती का ग्रामीण गतिविधियों में हिस्सा लेना नहीं, बल्कि उन परंपराओं का सामने आना भी है, जो आधुनिक जीवन की भागदौड़ में धीरे-धीरे पीछे छूटती जा रही हैं।




