झारखंड में मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal/PM POSHAN) योजना के संचालन और भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इस MDM Payment System के तहत अब तक मध्याह्न भोजन के लिए मिलने वाली राशि सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के बैंक खाते में भेजी जाती थी, लेकिन नई MDM Payment System व्यवस्था लागू होने के बाद यह राशि स्कूलों या समिति के खाते में नहीं जाएगी। इसके बजाय भोजन सामग्री उपलब्ध कराने वाले दुकानदारों को सरकार की ओर से सीधे भुगतान किया जाएगा।
झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण इस नई MDM Payment System व्यवस्था को लागू करने के लिए जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा। सरकार का उद्देश्य MDM Payment System को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और जवाबदेह बनाना है। यह बदलाव झारखंड में मध्याह्न भोजन योजना की दशा और दिशा दोनों बदल सकता है, क्योंकि वर्तमान में जिले के 3122 सरकारी विद्यालयों में 3.5 लाख बच्चों के लिए यह योजना उधार पर चल रही है ।
MDM Payment System: क्या है नई व्यवस्था?
नई MDM Payment System प्रणाली के तहत स्कूल पहले मध्याह्न भोजन के लिए आवश्यक सामग्री जैसे दाल, सब्जी, मसाले, तेल और अन्य खाद्य सामग्री स्थानीय दुकानदारों से खरीदेंगे। इसके बाद खरीद से संबंधित बिल और वाउचर ‘कुबेर पोर्टल’ पर अपलोड किए जाएंगे । संबंधित अधिकारियों द्वारा सत्यापन के बाद सामग्री उपलब्ध कराने वाले दुकानदार के बैंक खाते में सीधे भुगतान कर दिया जाएगा। इस MDM Payment System बदलाव के बाद सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के बैंक खाते में राशि भेजने और वहां से निकासी की पुरानी व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। पहले समिति के अध्यक्ष और संयोजिका के संयुक्त हस्ताक्षर से राशि निकाली जाती थी।
MDM Payment System: चार महीने से नहीं मिली कुकिंग कॉस्ट
नई MDM Payment System व्यवस्था लागू होने की तैयारी के बीच स्कूलों को पिछले करीब चार महीनों से कुकिंग कॉस्ट की राशि नहीं मिली है। अप्रैल 2026 से अब तक वित्तीय सहायता जारी नहीं होने के कारण कई सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन का संचालन प्रभावित हो रहा है । पिछले तीन महीने के दौरान 54 दिनों के बकाया कुकिंग कॉस्ट के बदले विभाग ने 12 जून को मात्र 4 दिनों की राशि ही विद्यालयों के खातों में भेजी ।
स्कूलों को चावल के अलावा दाल, सब्जी, तेल, मसाले और अन्य खाद्य सामग्री खरीदने के लिए कुकिंग कॉस्ट की राशि दी जाती है। राशि नहीं मिलने के कारण अधिकांश विद्यालय उधार लेकर भोजन योजना चला रहे हैं। उत्क्रमित मध्य विद्यालय, श्यामसिंह नावाडीह की प्रधानाध्यापिका बसंती कुमारी बताती हैं कि अप्रैल से अब तक केवल चार दिनों का कुकिंग कॉस्ट मिला है और दुकानदारों पर करीब 20 हजार रुपए से अधिक का बकाया हो चुका है ।
MDM Payment System: उधार लेकर चल रही है योजना
कई विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों का कहना है कि बच्चों का भोजन प्रभावित न हो, इसलिए स्थानीय दुकानदारों से उधार सामान लेकर भोजन तैयार कराया जा रहा है। लगातार भुगतान नहीं मिलने से दुकानदारों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कई दुकानदार पुराने बकाया का भुगतान किए बिना नई सामग्री उधार देने से इनकार करने लगे हैं । मध्य विद्यालय, गोलगो के प्रधानाध्यापक रामचंद्र प्रसाद यादव बताते हैं कि अप्रैल से कुकिंग कॉस्ट नहीं मिलने के कारण खाद्य सामग्री खरीदना लगातार मुश्किल होता जा रहा है ।
MDM Payment System में केंद्र और राज्य का सहयोग
मध्याह्न भोजन योजना का संचालन केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से किया जाता है। योजना के लिए 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार उपलब्ध कराती है । हालांकि, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अब तक कुकिंग कॉस्ट का आवंटन नहीं हो सका है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस माह के अंत तक राशि जारी होने की संभावना है। नई MDM Payment System व्यवस्था से भुगतान प्रक्रिया की बेहतर निगरानी और रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, साथ ही वित्तीय अनियमितताओं की संभावना कम होने की उम्मीद है।
MDM Payment System: शिक्षक संघ ने जताई चिंता
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि राशि नहीं मिलने से कई विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना बंद होने की स्थिति में पहुंच गई है । उन्होंने बताया कि शिक्षक अपने स्तर पर व्यवस्था कर रहे हैं या दुकानदारों से उधार सामान लेकर बच्चों को भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंद होता है तो कार्रवाई शिक्षकों पर होती है, जबकि समय पर राशि उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। संघ ने सरकार से जल्द से जल्द कुकिंग कॉस्ट जारी करने और नई MDM Payment System व्यवस्था को स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ लागू करने की मांग की है।
MDM Payment System से क्या होगा फायदा?
नई MDM Payment System व्यवस्था से कई फायदे होंगे: स्कूलों के खाते में राशि भेजने की प्रक्रिया समाप्त होगी, भुगतान पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगा, कुबेर पोर्टल पर वाउचर अपलोड होने के बाद सीधे दुकानदारों को भुगतान मिलेगा, भुगतान प्रक्रिया की बेहतर निगरानी और रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, और वित्तीय अनियमितताओं की संभावना कम होने की उम्मीद है। यह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मॉडल पर आधारित होगा ।
बाहरी संसाधन
- झारखंड सरकार का कुबेर पोर्टल: https://jkuber.jharkhand.gov.in
- पीएम पोषण योजना के बारे में जानकारी: https://www.education.gov.in
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