‘मंईयां सम्मान दिवस’ के तहत पूरे झारखंड में एक ही दिन भुगतान का प्रस्ताव फिलहाल नहीं होगा लागू, करीब 51 लाख महिलाओं को मिलते हैं ₹2,500

रांची: झारखंड की महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। पूरे राज्य की लाभुक महिलाओं के बैंक खातों में एक ही दिन सम्मान राशि भेजने की प्रस्तावित योजना फिलहाल लागू होती नहीं दिख रही है। यानी सितंबर-अक्टूबर से किसी एक तय दिन को ‘मंईयां सम्मान दिवस’ के रूप में मनाकर राज्यभर में एक साथ भुगतान करने का विचार फिलहाल टल गया है।
अब पहले की व्यवस्था के तहत ही अलग-अलग जिलों में लाभुक महिलाओं के खातों में राशि भेजी जाएगी। सरकार की ओर से योजना की भुगतान व्यवस्था में फिलहाल किसी बड़े बदलाव की बात नहीं कही गई है। कोशिश यही है कि पात्र महिलाओं को हर महीने नियमित रूप से सम्मान राशि मिलती रहे।
करीब 51 लाख महिलाओं को मिलते हैं ₹2,500
मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत झारखंड की करीब 51 लाख पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। यह योजना राज्य सरकार की प्रमुख सामाजिक कल्याण योजनाओं में शामिल है और बड़ी संख्या में महिलाएं इस आर्थिक सहायता पर निर्भर हैं। हालांकि, योजना के लिए इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार के सामने वित्तीय चुनौती भी बनी हुई है।
खनन राजस्व में कमी से बढ़ी चिंता
दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से पारित खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के बाद राज्य के खनन राजस्व पर संभावित असर को लेकर झारखंड सरकार चिंतित है।
राज्य सरकार का अनुमान है कि नए प्रावधानों के कारण उसे हर साल हजारों करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। सरकार का कहना है कि इसका असर सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं के बजट पर भी पड़ सकता है।
मंईयां सम्मान योजना के लिए ₹14,065 करोड़ का प्रावधान
वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में मंईयां सम्मान योजना के लिए 14,065 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना में हर महीने बड़ी संख्या में लाभुकों को राशि भेजी जाती है, ऐसे में इसके लिए लगातार पर्याप्त बजट की जरूरत होती है। राज्य सरकार खनिज राजस्व में संभावित कमी को लेकर केंद्र के समक्ष अपना पक्ष रख रही है। साथ ही इस मुद्दे को कानूनी स्तर पर भी चुनौती देने की तैयारी की जा रही है।
वित्त मंत्री ने जताई योजनाओं पर असर की आशंका
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने खनन राजस्व में संभावित कमी को राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए बड़ा झटका बताया है। उनका कहना है कि राजस्व प्रभावित होने की स्थिति में मंईयां सम्मान योजना समेत दूसरी कल्याणकारी योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन पर दबाव बढ़ सकता है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी केंद्र सरकार के नए खनन कानून को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं। राज्य सरकार का कहना है कि खनन से मिलने वाला राजस्व झारखंड के विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
केंद्र और राज्य के बीच बढ़ा विवाद
खनन राजस्व के मुद्दे पर केंद्र और झारखंड सरकार के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। राज्य सरकार नए कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। वहीं, केंद्र का तर्क है कि संशोधित व्यवस्था के बावजूद खनन से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा राज्यों को ही मिलता रहेगा और कानून का उद्देश्य खनन क्षेत्र में स्थिरता और पारदर्शिता बढ़ाना है।
इसी बीच सत्ताधारी गठबंधन ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन की रणनीति तैयार की है। झामुमो की ओर से चरणबद्ध आंदोलन और जरूरत पड़ने पर आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी दी गई है।
फिलहाल महिलाओं को क्या मिलेगा?
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि मंईयां सम्मान योजना के तहत भुगतान बंद करने या राशि में बदलाव की घोषणा नहीं हुई है। पूरे राज्य में एक साथ भुगतान की प्रस्तावित व्यवस्था जरूर फिलहाल आगे नहीं बढ़ रही है।
इसलिए लाभुक महिलाओं को पहले की तरह अपने-अपने जिलों के भुगतान कार्यक्रम के अनुसार राशि मिलने की उम्मीद है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकार खनन राजस्व को लेकर चल रहे विवाद और वित्तीय दबाव के बीच योजना का भुगतान कितनी नियमितता से जारी रख पाती है।

